ऑनलाइन बाप की चिता जलवाया!, गजब जमाना आ गया! | Bharat Ek Nayi Soch
रिश्तों का दिवाला: सोनीपत में करोड़पति पिता का वीडियो कॉल पर अंतिम संस्कार, आधुनिक समाज पर गंभीर सवाल
सोनीपत। आधुनिकता और डिजिटल क्रांति जहां एक ओर दूरियों को मिटा रही है, वहीं दूसरी ओर यह अपनों के बीच गहरी खाई भी पैदा कर रही है। सोनीपत के एक वृद्धाश्रम से सामने आई एक हृदय विदारक घटना ने इस कड़वी सच्चाई को एक बार फिर उजागर कर दिया है, जहां करोड़ों के कारोबार वाले एक पिता का अंतिम संस्कार उनकी करोड़पति बेटियों को वीडियो कॉल पर करना पड़ा।
यह घटना हमें रिश्तों की नाजुकता और बदलती सामाजिक प्राथमिकताओं पर सोचने पर मजबूर करती है। हमारी पड़ताल में सामने आया है कि दिवंगत पिता एक सफल व्यवसायी थे, जिनकी संपत्ति करोड़ों में थी। उनके जीवन का अंतिम पड़ाव वृद्धाश्रम में बीता, जहां उनकी देखभाल कर्मचारियों के भरोसे थी।
बताया जा रहा है कि उनकी बेटियां पढ़ी-लिखी और समाज में प्रतिष्ठित थीं, आर्थिक रूप से भी वे पूरी तरह संपन्न थीं। बावजूद इसके, अपने पिता के अंतिम समय में या उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उनके पास ‘समय’ का अभाव था। व्यस्तता के आड़े रिश्तों की मर्यादा भी दरकिनार कर दी गई और पिता की चिता को मुखाग्नि देते हुए दृश्य बेटियां अपने मोबाइल स्क्रीन पर वीडियो कॉल के माध्यम से देखती रहीं।
यह दृश्य केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की एक गहरी पड़ताल है। क्या हम डिजिटल प्रगति की दौड़ में मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक मूल्यों को पीछे छोड़ते जा रहे हैं? क्या पैसों की चमक रिश्तों की गर्माहट पर भारी पड़ रही है? यह सवाल आज हर उस व्यक्ति को परेशान कर रहा है, जो आधुनिक जीवन शैली के जाल में उलझता जा रहा है।
सोनीपत की यह घटना हमें आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है। क्या वास्तव में अपनों का प्यार और भावनात्मक जुड़ाव इतना गौण हो गया है कि उसकी जगह वर्चुअल उपस्थिति ले सकती है? यह कड़वी सच्चाई हमें स्वीकार करनी होगी कि पैसे से सब कुछ खरीदा जा सकता है, सिवाय उन अनमोल रिश्तों और अपनों के निस्वार्थ प्रेम के।



























































































































































एक तरफ करोड़ों का कारोबार और सुख-सुविधाएं, और दूसरी तरफ 6 इंच की मोबाइल स्क्रीन पर सिमटी पिता की अंतिम विदाई! क्या आपको लगता है कि हम डिजिटल होने के चक्कर में अपनों से बहुत दूर हो चुके हैं? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर शेयर करें। आपके कमेंट्स हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।