स्कूली छात्रों को पुलिस ने लात मारी, भड़क गए ये बाबा, टीचर नहीं होने का प्रोटेस्ट कर रहे थे

यूपी: अपने हक की आवाज बुलंद करते मासूमों पर पुलिस का बर्बर प्रहार, जूतों से कुचले गए बच्चे!

लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों के मासूम बच्चों पर पुलिस ने अमानवीय बर्बरता की सारी हदें पार कर दी हैं। अपने शिक्षकों और अच्छी शिक्षा के अधिकार की मांग को लेकर सड़क पर उतरे इन छात्रों को यूपी पुलिस ने जूतों से कुचल डाला, जिससे पूरे राज्य में आक्रोश का माहौल है।

राज्य सरकार जहां एक ओर शिक्षा के क्षेत्र में बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर 27 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों को बंद करने की तैयारी है। यह नीति इन बच्चों के भविष्य पर सीधा खतरा बन गई है। इतना ही नहीं, बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील में भी सड़ा अनाज परोसा जा रहा है, जो उनके स्वास्थ्य और भविष्य दोनों से खिलवाड़ है।

इस पूरे घटनाक्रम पर वरिष्ठ पत्रकार और समाज चिंतक संपूर्णानंद मल्ल जी ने मौजूदा व्यवस्था पर करारा प्रहार किया है। उनका सीधा सवाल है कि जब नेता और बड़े अधिकारियों के बच्चे महंगे निजी स्कूलों में पढ़ेंगे, तो इन गरीब और वंचित बच्चों के भविष्य की चिंता कौन करेगा?

मल्ल जी ने यह भी पूछा कि क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपने स्कूल के लिए शिक्षकों की मांग करना अब गुनाह बन गया है? पुलिसिया बर्बरता की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे अत्यंत विचलित करने वाली हैं और यह दर्शाती हैं कि प्रशासन किस हद तक संवेदनहीन हो चुका है।

ये दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर सकते हैं, जहां बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने पर क्रूरता का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस ने जिस तरह से प्रदर्शनकारी बच्चों को जूतों से कुचला, वह कानून के शासन और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है।

यह घटना योगी सरकार की शिक्षा नीतियों और प्रशासनिक संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ‘भारत एक नई सोच’ मांग करता है कि इस बर्बरता के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और बच्चों को उनके हक से वंचित करने वाली नीतियों पर पुनर्विचार किया जाए। इन मासूमों के लिए न्याय सुनिश्चित होना चाहिए।

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37 Comments

  1. आपको क्या लगता है, छोटे-छोटे बच्चों पर पुलिस द्वारा इस तरह से लात चलाना और बर्बरता करना कहाँ तक सही है? क्या लाठियों से सुधरेगी हमारी शिक्षा व्यवस्था? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं, हम आपके हर कमेंट को पढ़ रहे हैं! 👇

  2. ❤❤❤पल्लवी मैम की संवेदनशीलता और पूर्वाचंल के गांधी जी की निष्पक्षता, क्रांतिकारी विचार ,जायज विचार सैलूट के योग्य है, सैलूट,सैलूट,सैलूट🎉🎉🎉🎉🎉

  3. स्कूल के छोटे छोटे बच्चों को पुलिस वालों के द्वारा लात मारना साबित करता है कि ये पुलिस वाले अपने बच्चों को भी इसी तरह लात मारते होंगे लेकिन जिन बच्चों के मां बाप खुद के बच्चों को लात मारते होंगे तो बच्चों को भी लगता होगा कि क्या वो ऐसे ही राक्षसी टाइप के लोगो की औलाद है इसलिए जिन बच्चों ने अपने मां बाप का ऐसा एटिट्यूड महसूस किया होता है तो बूढ़े होकर ऐसे पुलिस वालों को भी उनके बच्चे प्रसाद के रूप में रिटर्न गिफ्ट निश्चित रूप से देंगे ही.

  4. ❤❤❤❤❤❤❤ऐ पुलिस वाले तत्काल बर्खास्त होने चाहिए,जो देश के भविष्य को जूतों से रौद सहे हैं, सीजेपी , राष्टीय, अंतर्राष्टीय मानवाधिकार को अनिवार्यतः नोटिस मे लेना चाहिए❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤

  5. पुलिस को क्या बाल बच्चे नहीं हैं😮 प्रशासन बेहोश है मर गई क्या?? नहीं संभाल सकते तो इस्तीफा दो क्यों नहीं देते ‌??? छात्रों पर अत्याचार प्रशासन द्वारा शर्म करो रक्षक हो तो भक्षक मत बनो! गैर फायदा मत लो !
    टिचरो की सीटों पर काफी कम भर्ती कराया जा सरकार की यही मनशा होगी अनपढ़ गंवार अंधभक्त समाज बनाना चा‌हती है

  6. इन पुलिस वालो का इनकाउटर होना चाहिए जो बच्चो को लात मारे है..निकलो बाहर इनके गार्जियन। ।

  7. Illeterate p.m hai vaise hi education minister hain .so how can be all right in schools .homeminister bhi vaisa hi hai .then his police bachon ko laaatt hi marenge .desh ki jantta murkh hai jo vote in chir tuglkin ko hi dette hain .

  8. बच्चों का सड़कों पर उतरना, इस बात का सबूत है कि देश को चलाने वाले गलत दिशा में जा रहे हैं और सरकार चलाने में पूरी तरह से अक्षम हैं। देश को गंभीरता से सोचना चाहिए।

  9. भारत मे मोदी की पुलिस बच्चो को लाते मारती है इससे अधिक दमन और क्या होगा बच्चो को तो कभी अंग्रेज़ी पुलिस ने भी लाते नही मारी ।

  10. आरएसएस और बीजेपी मनुवादियों की पार्टी है और ये मरते दम तक नहीं चाहेंगे कि किसी दलित का बच्चा आगे बढ़े 😡

  11. सरकारी शिक्षा को बिल्कुल बर्बाद कर ने के लिए अध्यापको की भर्ती बंद कर दो दरअसल शिक्षा मित्र की भर्ती करके तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व मुलायम सिंह यादव ने शुरूआत की अब भाजपा के मुख्यमंत्री योगी जी ने शिक्षा का बजट कम करते-करते न्यूनतम कर दिया और शिक्षा के बजट को मंदिरो के जीर्णोद्धार करा रहे है उसी पैसे कांवडियो की यात्रा मे डीजे खाने पीने फूल बरसाने पर खर्च किया जा रहा है ।अब प्राइवेट स्कूल इंजीनियरिंग कालेज इंटर कॉलेज डिग्री कालेज विश्व विद्यालय धडाधड खुल रहे है इस समय प्राइवेट स्कूल मे नरसरी मे नाम लिखाने के लिए एक हजार रूपए खर्च करने पड रहे है किताबे ड्रेस स्टेशनरी बस किराया अतिरिक्त । यह हाल है । इंटर कॉलेज के छात्र की फीस दस हजार रूपए प्रति माह के लगभग है।