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फतेहपुर: भीषण गर्मी में बुनियादी सुविधाओं को तरसते बच्चों का फूटा गुस्सा, शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

फतेहपुर, उत्तर प्रदेश: देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के किशनपुर कस्बे स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्रों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर आ गया है। भीषण गर्मी के इस दौर में, जब एक तरफ ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘विकास’ के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ये मासूम स्कूली बच्चे अपने बुनियादी हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कॉलेज प्रशासन और स्कूल प्रबंधन की कथित तानाशाही के खिलाफ ये छात्र साफ पानी, बिजली, पंखे और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। छात्र-छात्राओं का कहना है कि कक्षाओं में न तो पर्याप्त पंखे हैं और न ही बिजली की व्यवस्था दुरुस्त है, जिससे भीषण गर्मी में पढ़ाई करना असंभव हो गया है। पीने के साफ पानी का अभाव और जर्जर शौचालय जैसी समस्याएं उनकी सेहत और शिक्षा दोनों पर भारी पड़ रही हैं।

बच्चों के अनुसार, इन समस्याओं को लेकर कई बार स्कूल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन हर बार उनकी आवाज़ को अनसुना कर दिया गया। जब सभी उम्मीदें टूट गईं, तब इन बच्चों ने अपने भविष्य और अधिकारों के लिए सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया।

यह घटना केवल एक स्कूल की नहीं, बल्कि पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। क्या हम वाकई ‘विकास’ की राह पर हैं, जब हमारे देश के भविष्य को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी प्रदर्शन करना पड़ रहा है? सरकार के बड़े-बड़े अभियान और जमीनी हकीकत के बीच की यह खाई चिंतनीय है।

स्थानीय अभिभावकों और बुद्धिजीवियों ने भी छात्रों के इस संघर्ष को अपना समर्थन दिया है। उनकी मांग है कि जल्द से जल्द स्कूल की स्थिति में सुधार किया जाए और बच्चों को एक ऐसा माहौल मिले जहाँ वे बिना किसी परेशानी के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। ‘भारत एक नई सोच’ की यह ग्राउंड रिपोर्ट शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त इन गंभीर विसंगतियों को उजागर करती है और प्रशासन से तुरंत इस मामले पर संज्ञान लेने की अपील करती है।

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13 Comments

  1. "क्या आपके इलाके के सरकारी स्कूलों में भी बुनियादी सुविधाओं (पानी, बिजली, साफ शौचालय) की ऐसी ही बदहाली है? इस पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट करके जरूर बताएं। आइए इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा करें!"

  2. Bhai hum logon ko badlav nahi elections me daru, biriyani aur paise chahiye hum ko 15 lakh ka jumla chahiye notebandi ke naam per line me khadi maa chahiye humare bachey punjivadiyon ke talavey chatey aisy sarkar chahiye garibon ke ghar todne vale bulldozer chahiye rapist baba ji chahiye berojgari chahiye bhik mangte aur jurm karte educated youths chahiye

  3. जब सरकार छात्रों को बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया नहीं करा सकती जो देश का भविष्य हैं, उनकी मांगे अनसुनी कर दी जाती हैं तो संघर्ष ही एक रास्ता बचता है।