Mid Day Meal में मिलाया नमक की जगह सर्फ, बच्चे हुवे बीमार, Bharat Ek Nayi Soch

नालंदा में मिड-डे मील में ‘सर्फ’ का कहर: 40 से ज़्यादा बच्चे अस्पताल में, सरकारी सिस्टम पर गंभीर सवाल!

नालंदा, बिहार: हमारे देश में गरीब बच्चों की जान की कीमत क्या है? यह सवाल एक बार फिर बिहार के नालंदा से सामने आए एक खौफनाक मामले के बाद उठ खड़ा हुआ है, जिसने पूरे बिहार शिक्षा व्यवस्था और सरकारी दावों की पोल खोल कर रख दी है। मिड-डे मील के नाम पर बच्चों को खाने में नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर (सर्फ) परोस दिया गया, जिससे 40 से ज़्यादा बच्चे अस्पताल पहुंच गए और उनकी जिंदगी दांव पर लग गई।

यह घटना सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता को उजागर करती है। मासूम बच्चों को दिया गया यह ‘ज़हर’ सरकारी स्कूलों की भयावह हकीकत बयान कर रहा है। ‘भारत एक नई सोच’ की हमारी टीम ने इस मामले की तह तक जाकर सरकारी स्कूलों की सच्चाई का पर्दाफाश किया है।

हमारी पड़ताल में सामने आया कि इन सरकारी स्कूलों में ना तो बच्चों के लिए शौचालय की व्यवस्था है और ना ही पीने का साफ पानी उपलब्ध है। आखिर किस भरोसे इन बच्चों को ऐसी जगहों पर भविष्य संवारने के लिए भेजा जाता है, जहां उनकी मूलभूत ज़रूरतों का भी ध्यान नहीं रखा जाता?

स्थिति तब और भी गंभीर हो गई जब बीमार बच्चों को अस्पताल ले जाया गया। बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था का बुरा हाल वहां भी स्पष्ट दिखा। एक बेड पर तीन-तीन बच्चे तड़प रहे थे और एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुई। यह मंजर देखकर हर किसी का कलेजा दहल उठा। क्या यही है हमारे ‘विश्वगुरु’ बनने की सच्चाई?

यह सिर्फ नालंदा का अकेला मामला नहीं है। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक मिड-डे मील के नाम पर हो रहा यह भ्रष्टाचार एक सिस्टम एक्सपोज्ड करता है। यह सिस्टम बच्चों के भविष्य और उनकी जान के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहा है।

हमारी मांग है कि इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच हो। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं। बच्चों की जान से खिलवाड़ करने वाले इस ‘सिस्टम’ से सवाल पूछना हमारा कर्तव्य है, ताकि ‘भारत एक नई सोच’ के सपनों को हकीकत में बदला जा सके।

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4 Comments

  1. यह सबसे बड़ा घोटालाबाज सरकार है मिड डे मील के जगह डिटर्जेंट पाउडर कौन मिलता है बच्चों को जिंदगी मौत से खेला जा रहा है