PM को गाली देना जुर्म नहीं? गाली देने वाली लड़की को EX-IPS का समर्थन | Bharat Ek Nayi Soch
जंतर मंतर पर छात्रों पर दिल्ली पुलिस की बर्बरता: पूर्व IPS Darapuri ने ‘भारत एक नई सोच’ पर खोली पोल, उठाए गंभीर सवाल
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस की कथित बर्बरता ने एक बार फिर देशव्यापी बहस छेड़ दी है। इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब तलाशना बेहद ज़रूरी है। क्या पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से निपटने में नियमों का उल्लंघन किया? क्या यह युवाओं की आवाज़ दबाने की कोशिश है?
प्रत्यक्षदर्शियों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, युवाओं पर बिना किसी पूर्व चेतावनी के लाठीचार्ज किया गया। प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन का इस्तेमाल भी किया गया, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए। सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि घटनास्थल पर AK-47 जैसे आधुनिक हथियार भी मौजूद थे, जो शांतिपूर्ण प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की तैयारी पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
इस पूरे मामले की परतें ‘भारत एक नई सोच’ की पत्रकार पल्लवी के साथ एक विशेष साक्षात्कार में पूर्व IPS अधिकारी एस.आर. दारापुरी ने खोली हैं। दारापुरी जी ने पुलिस मैनुअल के प्रावधानों पर विस्तार से बात की और बताया कि प्रदर्शनकारियों से निपटने में किन नियमों का पालन किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कई मौकों पर इन नियमों का उल्लंघन होता दिख रहा है।
सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी की वैधता पर भी दारापुरी जी ने सवाल उठाए। अक्सर ऐसे में पहचान छिपाकर कार्रवाई करने से भ्रम और अविश्वास की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की वर्दी पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए ज़रूरी है।
एक और हृदय विदारक खुलासा 15 वर्षीय उस लड़की के बारे में हुआ, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर FIR दर्ज की गई और उसके घर पर पुलिस भेजी गई। यह घटना बच्चों के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर चिंताएं पैदा करती है। क्या एक नाबालिग लड़की पर ऐसी कठोर कार्रवाई जायज थी?
पूर्व IPS अधिकारी ने इस बात पर भी जोर दिया कि क्या यह सब ‘जेन ज़ेड’ (Gen Z) के विरोध प्रदर्शनों को दबाने की सोची-समझी कोशिश है? यह सवाल अब हर किसी की ज़ुबान पर है। युवा अपनी आवाज़ उठा रहे हैं और उन्हें संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों पर चोट है।
जंतर मंतर पर हुई यह घटना सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करने का मामला नहीं है, बल्कि यह नागरिक अधिकारों, पुलिस की जवाबदेही और लोकतंत्र में युवाओं की भूमिका से जुड़े कई गहरे मुद्दों को उठाती है। आवश्यकता है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और देश के युवाओं का न्यायपालिका तथा प्रशासन पर विश्वास बना रहे।



























































































































































"पूर्व IPS दारापुरी जी की बातों से आप कितना सहमत हैं? जंतर-मंतर पर छात्रों पर पैलेट गन चलाना और एक 15 साल की बच्ची के घर पुलिस का दबिश देना… आपके हिसाब से लोकतंत्र में यह कितना सही है? अपनी बेबाक राय नीचे कमेंट्स में जरूर लिखें, हम आपके हर कमेंट को पढ़ रहे हैं! 👇"
मै गधों का समर्थन नहीं करता
I agree 100%
अगर ये गलती नहीं करते तो यूथ छात्र कभीभी गालीगलौच नहीं करते ये छात्रों पर बहुत अत्याचार हुआ,आंसू ग्यास,लाठी चार्ज, प्यालट गन, एके 40,चलाई गई ओ छात्र तो बहुत ही शांति से अनशन पर बैठे थे,इतना अत्याचार कौन सहेंगे यहां छात्र की कोई गलती नहीं है,ये अगर बातचीत सही समय पर करती तो इतना कांड नहीं होता , येतो सब सरकार की घंटिया ,घमंड जवाबदार है