Jantar Mantar, Sonam Wangchuk Hunger Strike: क्या होगा सोनम वांगचुक का? | Bharat Ek Nayi Soch
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जंतर-मंतर पर धधकती युवाओं की आवाज़: सोनम वांगचुक का 17-दिवसीय अनशन और भविष्य की लड़ाई
दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर एक बार फिर युवाओं के आक्रोश का गवाह बन रहा है। प्रख्यात शिक्षाविद् सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनके साथ देश के कोने-कोने से आए छात्र अपने भविष्य के लिए निर्णायक संघर्ष कर रहे हैं। यह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक गहरी चिंता और व्यवस्था परिवर्तन की मांग है।
सोनम वांगचुक का अडिग संकल्प आज पूरे देश के युवाओं को प्रेरणा दे रहा है। अपने अधिकारों और एक बेहतर कल की आस में, सैकड़ों छात्र और युवा इस शांतिपूर्ण आंदोलन का हिस्सा बन रहे हैं। उनकी मांगें स्पष्ट हैं और उनकी आवाज़ में वो दृढ़ता है जो अक्सर किसी बड़े बदलाव की सूचक होती है।
जंतर-मंतर पर चल रहे इस छात्र आंदोलन में शामिल 32 छात्रों की हालत लगातार बिगड़ रही है, बावजूद इसके उनके हौसले पस्त नहीं हुए हैं। वे बिना किसी लाग-लपेट के अपनी बातें रख रहे हैं, यह दर्शाते हुए कि उन्हें अपने भविष्य की कितनी परवाह है। यह केवल उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के शैक्षिक और राजनीतिक भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण लड़ाई है।
चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्यधारा का मीडिया और सरकार दोनों ही इस गंभीर मुद्दे पर रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं। जहां एक ओर देश के भविष्य के कर्णधार संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी आवाज़ को अनसुना किया जा रहा है। यह खामोशी कई सवाल खड़े करती है – क्या युवाओं की चिंताओं को अनदेखा करना इतना आसान हो गया है?
मौजूदा छात्र आंदोलन की तुलना अनायास ही इतिहास के अन्ना हजारे आंदोलन से की जा रही है। तब भी और अब भी, शांतिपूर्ण एवं गांधीवादी तरीके से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन आज के समय में ऐसे आंदोलनों का प्रभाव कम क्यों होता जा रहा है? यह एक ऐसा सवाल है जो भारतीय राजनीति और समाज को आत्मचिंतन के लिए विवश करता है।
क्या शिक्षा मंत्री इस गंभीर स्थिति पर अपनी कोई प्रतिक्रिया देंगे? क्या वे युवाओं की मांगों पर ध्यान देंगे, या उनकी आवाज़ को ऐसे ही नजरअंदाज कर दिया जाएगा? यह आंदोलन केवल कुछ छात्रों की मांग नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक प्राथमिकताओं की दिशा पर एक बड़ा सवालिया निशान है।
जंतर-मंतर पर जारी यह प्रदर्शन सिर्फ एक धरना नहीं, बल्कि एक जन-जागरण है। यह समझने की आवश्यकता है कि देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ रही है और इन युवाओं की आवाज़ को कब तक दबाया जा सकेगा। ‘भारत एक नई सोच’ के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि इस संघर्ष को समझा जाए और इसकी गंभीरता को स्वीकारा जाए।







































































सोनम वांगचुक और छात्रों के इस शांतिपूर्ण अनशन पर सरकार की चुप्पी को आप किस तरह से देखते हैं? क्या आपको लगता है कि आज के समय में बिना उग्र हुए कोई आंदोलन सफल हो सकता है? अपनी बेबाक राय नीचे कमेंट्स में लिखें, हम आपके हर कमेंट को पढ़ रहे हैं! 👇
Sonu akele nhi hun in bachon ka kya kasur han sbhi ek hi time ke sanik han hume in sb pr garve h
सोनम वांगचुक बच्चों के लिए भूख हड़ताल पर नहीं बैठा है।यह बात उसने स्वयं बताई है कि वह तो लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा बनाने के लिए अनशन पर बैठा है। दुसरा सरकार FCRA बन्द करने जा रही है। जिससे सोनम वांगचुक की कमाई वाली दुकान बन्द हो जाएगी।
बाकी सोनम वांगचुक पूर्णतः कांग्रेस समर्थित व्यक्ति हैं।ओर ईसाई मिशनरियों के इशारों पर यह आंदोलन चल रहा है।
Gen z must erupt,all parties c 32:32 ome together envade parliament,encircle bjp minsters kick out from country then declare dismiss govt
ये आंदोलन तो एक दिन खत्म हो जायेगा पर ये अवसर देश में पुनः नही आयेगा, नकारात्मकता मत फैलाये
मैं ना वांगचुक के साथ हूं ना ही किसी ओर के साथ।जिस मंच पर देशविरोधी आकर गाना गाए ,कि ।।।नाम रहेगा सिर्फ अल्लाह का।।।
ओर दुसरी आई और कहा गई कि कश्मीर, पंजाब हैदराबाद नागालैंड मणिपुर भारत का हिस्सा नहीं है और वहां हड़ताल पर बैठे लोग तालियां बजा रहे थे।दिपके तालियां बजा रहा था दहिया ओर दास तालियां बजा रहे थे।तो आप लोग क्या चाहते हैं कि सरकार ऐसे देश विरोधीयों के साथ बात करें। जो मरते हैं वह मरे।मे तो अपने देश के साथ खड़ा हूं।जो जेएनयू डफ़ली गैंग के साथ है वह देश भक्त नहीं हो सकते।
CJP seDhesh ko Bachao.
आन्दोलन कमजोर नही है, सरकार ढीठ है, अन्ना के समय सरकार ढीठ नही थी, आप लोग बहस कर रहे हो, आप क्यों नहीं बैठ रहे हो, यह आन्दोलन आप सभी का है।
Sabse bara bipach koi kam ka nahi hai
यह दाडिवाले महाराज लगातार अभिजित दिपके की कमिया पर ही बोल रहे और दीपके का लगातार विरोध कर रहा है, बजाय उसकी हिंमत बढाने। मेरी दिपके जी से अनुरोध है कि यह आंदोलन दाडिवाले महाराज को सौंपे। देखते है वे कितना तीर मारते है???
सभी जानते है कि, यह हुकुम शाही, दडपशाही, असंवेदनशील सरकार कुछ भी सुननेवाले नही है, , और जादातर बडे लोग बीजेपी के समर्थक है और यही कारण है वे ईनके साथ नही आ हे है। अब इस दीडशहाणे दाडिवाले को ही अनशन का हिरो बना दे। यह बुढा जातिवादी नजर आता है।
बकवास बाते कर रहा है यह दाडीवाला बावा। यह बुढा लगाकर अभिजित दिपके की ही खामिया बक रहा है, इनके आंदोलन को बदनाम कर रहा है।
बार बार अन्ना अन्ना कर रहा है, जो बीजेपी का दलाल साबित हुआ है। एक दलित का पुढाकार इस बाबा को खटक रहा है, यह जातंकवादी महाराज है, ईसे आंदोलन से दूर रखे ।
SONAM SAHAB YE SARKAR KOI SUNEGE NAHI.AAP AANSHAN CHOD DEDIJIYE. ⁰ OUR LADHA _CHALU RKHIYE
Ye sarkar ko koi fark nahi padta kisi se koi jiye mare . Please 🙏🏻😭 Sonam Wangchuk sir aap apne sehat ka khayal rakhe khana khaye dawai le jaldi thik ho Jaye
App kesa hoga sahi ye batayenge aap to God he ka argument suru kar dia।।
#Adhunik Gandhi ji aap tiranga uthao Sonam Wangchuk ka Asan ko torne keliye kadam baddao #jai bhim jai samvidhan naamo buddha Harishankar Roy obc aap se nivedan karta hai aap Delhi jayen ❤❤❤❤
Sonam Wangchuk ji ke swasth ko gambhirta se dekhte hue sarkar ko unse sakaratmak baarta sheeghra karna chahiye . Undekhi sarkar ko pachtabe ke alawa kuchh naheen bachega
Bania sarkar ko aam aadmi se. Koi matlob nahi
asar to padega jo log abhi mobile tv par youtube par dekh raha hai agli chunav mai yaad rakhengay
modi ki company mai koi Estifa nahi dega, pvt ltd hai
Kuch farak nahi padtha hi modi &co ko.
Are Modi ko gardan pakad ke hataao pahle sab hat jaayenge
Think over changing the track, time has changed, just by putting precious lives at stake, we cannot make despots bend down.
Sarkaar tanasaah h
Agrej se jada kharab h kishi ke jivan ka koi mahatv nhi❤❤❤❤❤
Anna Rss Agent Tha
अन्ना हजारे जैसे कमिनों के कारण जनता का आंदोलन से भरोसा उठ गया है जबकि जनता मोदी सरकार से ऊब चुकी है
PEPAR LIKSE 30 CHHATRA AATMA HATYA KARI CHHANTY FERVI MODIJI KO
FARAK NAHI PARDTE HEI
BJP HATAO DESHKO LUTANESE BACHAO JAGO JANATA JAGO GHARSE
BAHAR NIKILE TAVI KUCHHA
HO SAKTA HEI.
Sonam wangchuk is. Great man Godbless U
गांधीवादी तरीके से कुछ नहीं होने वाला है पल्लवी जी,स्वामी जी ठीक कह रहे हैं सरकार को कोई फर्क नहीं पडता,वह तो संवेदनहीन है,अलोकतांत्रिक हैऔर एनारकिस्ट है।वांगचुक के मरने तक वह इंतजार करते रहेगीऔर जश्न भी मनाएगी।आज के हालात अनशन के लायक नहीं बचे हैं।लोकतंत्र का जनाजा निकल चुका है।दीपके एक अच्छा लडका है लेकिन अनुभव की कमी है।आंदोलन का दायरा संकीर्ण है। आंदोलन से पहले विपक्ष को विश्वास में लेना चाहिए था।यह लडाई सत्ता के लिये नहीं लोकतंत्र को बचाने के लिए होना चाहिए था।
जिस देश के शिक्षक और वैज्ञानिक धरने पर बैठने लगे तो समझो देश खतरे में है क्योंकि वह बुद्धिजीवी वर्ग होता है जो सामने आने की हिम्मत रखता है
Sir aap log anubhavi log hain 🙏aap log aalochana chhodkar is aandolan ka samarthan Karen .yuvaon ka manobal badhaen.
मै सोनम वांगचुक जी से बिनती करता हूं कि आप अनशन न करे।
अँकरने कम बोलना चाहीये
जवाब जादा सूनना चाहीये
Why comparing with Anna andolan,
Abhijeet ko kyo under estimate karr rahe hei, he is intelligent, witty punches dethaa hei, he is managing the crowd simply by raising his hand, he manages police too with tactics,
अगर कोई सरकार प्रार्थना करने पर वाजिब मांग पर कोई बात चित न करें तो भगतसिंह बनना चाहिए।
ये सरकार लोगो को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करती है, शिक्षा विभाग को तहस नहस क्र दिया है, टीजीटी पीजीटी धांधली की बजह से हिंदी के छात्र ने फांसी लगाई ली या नई नियमावली लागू होने की बजह से हजारों गरीब युवा आत्महत्या करने के लिए मजबूर, कितने आंदोलन कर रहे हैं लोग पत्थर गिरजाघर प्रयागराज मैं, मगर इस सरकार के कान पर जू नहीं रेंगती……शर्म करो इस सरकार पर😢😢😢😢😢😢😢😢😢😢😢मेरा मानसिक संतुलन खुद इतना खराब हो चुका है हर पल आत्महत्या करने के अलावा कोई रास्ता नजर नहीं आता .. तकनीकी कला को हटा दिया टीजीटी से, पीजीटी में बी.एड लागू कर दिया, एनआईओएस डी एल एड कराया वह भी इस सरकार ने मान्य नहीं किया अब कोई रास्ता नहीं बचा, इंसान आत्महत्या ना करे तो क्या करेगा😢😢😢
Waqt.aa.gaya..hai.ab.sabhi.vipakshi.partyo.khul.kar.c.n.g.ko.sapot.karna.chaiye
Abhijit haat na jodo pawa na pakdo Ye Na Gandhi Ji na Babasaheb ne kiya is ke aage Jail hai Thanks
Jai.bhim.jai.savidhan
1925 में communist party of India की स्थापना ने देश के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई ऊर्जा और नए संदर्भ भी दिए जिन्हें स्वाधीनता आंदोलन के सक्रिय नेताओं ने भी स्वीकार किया और अपनी एजेंडे में शामिल किया.
इस आंदोलन में भी उनके द्वार घोषित विषयों की अनदेखी नहीं की जा सकती है क्योंकि वे विषय देश के सामाजिक और आर्थिक समस्याओं से संबंधित हैं. 🙏🏻🙏🏻
I was at Jantar Mantar (the site of the protest) yesterday. Sonam Wangchuk is heavily guarded by goons and not allowed to eat. He looked more like a prisoner to me.
युवाओं की समस्या को लेकर चल रहा आंदोलन कुछ अराजक तत्वों के द्वारा हाई जैक करने के वाद अलग अलग अनेकों मुद्दे उछाले गए जिनका छात्र आंदोलन से दूर दूर तक कोई संबंध नहीं था इसी कारण युवाओं का आंदोलन दिशा हीन हो गया है इस लिए इस आंदोलन को सरकार भी हल्के में ले रही है जिससे युवाओं का नुक़सान हो रहा है। जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳