पुलिस बनी भीगी बिल्ली!, पुलिस वैन तोड़ी वर्दी फाड़ी? मारा? स्कूल वैन तोड़ा | Bharat Ek Nayi Soch
उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल: कांवड़ यात्रा में गुंडागर्दी और पुलिस का दोहरा रवैया
उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुई कांवड़ यात्रा के दौरान सामने आई अराजकता और गुंडागर्दी ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘भारत एक नई सोच’ की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि किस तरह धर्म की आड़ में खुलेआम कानून का मखौल उड़ाया गया और यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ गई है।
मेरठ में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहां कांवड़ियों की भीड़ ने पुलिस की जीप पर मॉब लिंचिंग की कोशिश की। यह दृश्य प्रदेश में कानून के राज के दावों को चुनौती देता है, जब खाकी वर्दी को ही बेकाबू भीड़ के आक्रोश का सामना करना पड़ा। यह घटना दर्शाती है कि कानून का भय किस हद तक कम हो चुका है।
वहीं, राजधानी लखनऊ में मासूम बच्चों को ले जा रही एक स्कूल वैन पर हमला हुआ। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था की कमजोरी दर्शाती है, बल्कि समाज में बढ़ती असहिष्णुता और हिंसा के प्रति संवेदनशीलता के अभाव को भी उजागर करती है। बच्चों पर हमला किसी भी सभ्य समाज में अस्वीकार्य है और यह सीधे तौर पर प्रशासन की विफलता है।
कांवड़ यात्रा के दौरान धर्म की आड़ में खुलेआम चरस जैसे नशीले पदार्थों का सेवन किया जा रहा था। सबसे गंभीर बात यह है कि पुलिस प्रशासन इस पर मूकदर्शक बना रहा या उसका रवैया दोहरा रहा। एक तरफ आम जनता पर छोटे से उल्लंघन के लिए सख्त कार्रवाई होती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे दृश्यों पर आंखें मूंद ली जाती हैं। यह दोहरा मापदंड आम जनता में भरोसे की कमी पैदा करता है।
ये घटनाएं सवाल उठाती हैं कि क्या यही ‘अमृत काल’ है, जिसका गुणगान किया जाता है? क्या यह ‘राम राज्य’ की परिकल्पना है, जहां आम नागरिक और यहां तक कि पुलिस भी सुरक्षित नहीं है? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में ऐसी घटनाएं प्रदेश की छवि को धूमिल करती हैं।
कानून और व्यवस्था को लेकर जो दावे किए जाते हैं, वे जमीनी हकीकत से कोसों दूर नज़र आते हैं। धर्म के नाम पर गुंडागर्दी और पुलिस का ढुलमुल रवैया प्रदेश की सुशासन की नींव को हिला रहा है। इन गंभीर घटनाओं पर सरकार और पुलिस प्रशासन को तत्काल जवाबदेही तय करनी होगी।



























































































































































दोस्तों, मेरठ और लखनऊ की इन भयावह घटनाओं पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि पुलिस ऐसे मामलों में दबाव में काम कर रही है या सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है? अपनी बेबाक राय कमेंट्स में जरूर लिखें।
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yah Bhagwan ke bhakti ka Dharm ka licence nahin Hai yah hurting karne ka nasha dikhane ka licence hai