Government Schools की शर्मनाक सच्चाई! बच्चे सड़क पर, टीचर रील में व्यस्त | Bharat Ek Nayi Soch
सरकारी स्कूलों की दुर्दशा: ‘विकसित भारत’ के दावों पर सवाल उठाती जमीनी हकीकत
देश की शिक्षा प्रणाली गंभीर संकट का सामना कर रही है। सरकारी स्कूलों की बदहाली अब इस हद तक पहुँच गई है कि नौनिहाल बच्चे बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश तक, सामने आ रही जमीनी हकीकतें ‘डबल इंजन सरकार’ द्वारा किए जा रहे ‘विकसित भारत’ के दावों पर गहरा सवालिया निशान खड़ा करती हैं। ‘भारत एक नई सोच’ की यह ग्राउंड रिपोर्ट शिक्षा व्यवस्था के खोखलेपन को उजागर करती है।
उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंतनीय बनी हुई है। कानपुर में एक बच्चा जब अपनी शिकायतों को लेकर सीधे थाने पहुँचता है, तो यह पूरे सिस्टम की नाकामी का एक कड़वा सच बयान करता है। वहीं, हमीरपुर जैसे ग्रामीण इलाकों में स्कूली बच्चों को टूटी सड़कों या बिना सड़क के ही पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता है, जो सुरक्षित आवागमन के अभाव को दर्शाता है। यह घटनाएं सिर्फ इक्का-दुक्का मामले नहीं, बल्कि राज्य भर में व्याप्त लापरवाही और अव्यवस्था की बानगी हैं।
मध्य प्रदेश भी इस दुर्दशा से अछूता नहीं है। विभिन्न जिलों में बच्चे अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन विरोधों के बीच मिड-डे मील योजना की हकीकत भी सामने आई है, जहाँ बच्चों को दिए जाने वाले भोजन में कीड़े मिलने की खबरें आम हो चुकी हैं। पौष्टिक आहार देने की महत्वाकांक्षी योजनाएं भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ती दिख रही हैं।
यह सवाल लाजमी है कि जिस ‘डबल इंजन सरकार’ को सुशासन और तीव्र विकास का पर्याय बताया जाता है, क्या यही उसका ‘विकसित भारत’ है? जहाँ देश के भविष्य को संवारने वाले स्कूलों में बुनियादी सुविधाएँ, साफ-सफाई और खाने लायक भोजन तक उपलब्ध नहीं है। सरकारी स्कूलों की यह दयनीय स्थिति हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार की ओर धकेल रही है।
शिक्षा किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला होती है। यदि यह आधार ही कमजोर और जर्जर होगा, तो उस पर एक मजबूत और ‘विकसित’ राष्ट्र की इमारत कैसे खड़ी होगी? यह स्थिति केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चुनौती है। सरकार को इन जमीनी हकीकतों का संज्ञान लेना चाहिए और तत्काल प्रभाव से सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए ठोस व पारदर्शी कदम उठाने होंगे, ताकि देश के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार और एक उज्ज्वल भविष्य मिल सके।






































































































































































































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