लाखों सैलरी लेकर शिक्षक गायब, छात्र ने शिकायत की तो प्रिसिपल ने दी धमकी, Bharat Ek Nayi Soch
‘मिशन कायाकल्प’ की खुली पोल! आजमगढ़ में बिना केमिस्ट्री टीचर सड़क पर उतरी छात्राएं, भविष्य पर ‘एसिड’ जैसा खतरा
आजमगढ़, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के जीयनपुर स्थित स्मिथ इंटर कॉलेज में शिक्षा के गिरते स्तर और सरकारी उदासीनता का एक विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां की छात्राएं सड़क पर उतरने को मजबूर हैं, क्योंकि उनके स्कूल में केमिस्ट्री पढ़ाने वाला कोई शिक्षक ही नहीं है। यह घटना ‘मिशन कायाकल्प’ जैसे सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है, और उजागर करती है कि कैसे हमारे देश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था सिर्फ फाइलों तक सीमित होकर रह गई है।
स्मिथ इंटर कॉलेज की ये बेटियां अपने भविष्य को अंधकार में डूबता देख रही हैं। जिस उम्र में उन्हें विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को समझना चाहिए, उसी उम्र में वे अपने भविष्य को ‘एसिड’ की तरह जलता हुआ महसूस कर रही हैं। प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम न उठाए जाने के बाद, इन युवा छात्राओं ने अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए सड़कों का रुख किया है, जो व्यवस्था के लिए एक करारा तमाचा है।
यह सिर्फ आजमगढ़ की कहानी नहीं है। देश के कई हिस्सों में सरकारी स्कूलों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। एक तरफ जहां छात्र बिना शिक्षक के शिक्षा, बिना छत के क्लासरूम और मिड-डे मील में नमक-रोटी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ राज्य सरकारें, जैसे राजस्थान, समस्याओं को सुलझाने के बजाय स्कूलों में ‘कैमरे और पत्रकारों’ की एंट्री ही बैन कर रही हैं। यह पारदर्शिता को खत्म करने और सच्चाई को छिपाने का एक निराशाजनक प्रयास है।
मौजूदा स्थिति में ‘Gen Alpha’ के ये छात्र-छात्राएं, जिन्हें डिजिटल युग का भविष्य माना जाता है, बुनियादी शिक्षा से भी महरूम हैं। इन युवा और ऊर्जावान छात्रों का सड़कों पर उतरना प्रशासन की गहरी नींद को तोड़ने के लिए काफी है। उनकी यह आवाज़ केवल एक केमिस्ट्री टीचर की मांग नहीं है, बल्कि यह देश की शिक्षा प्रणाली में व्याप्त गहरी कमियों और जवाबदेही की कमी पर एक सीधा प्रहार है।
जरूरत है कि सरकारें ‘मिशन कायाकल्प’ जैसे खोखले दावों से ऊपर उठकर जमीनी हकीकत पर ध्यान दें। इन मासूमों के भविष्य को सुरक्षित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इन छात्राओं की आवाज़ को अनसुना करना देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा होगा। ‘भारत एक नई सोच’ अपील करता है कि इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई की जाए ताकि देश का हर बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सके।






































































































































































































सरकारें स्कूलों में टीचर और सुविधाएँ देने के बजाय "कैमरे" बैन करके अपनी नाकामी क्यों छुपाना चाहती हैं? क्या आपको भी लगता है कि 'मिशन कायाकल्प' सिर्फ एक दिखावा है? इस पूरे मुद्दे पर आपकी क्या राय है, कमेंट करके जरूर बताएं! 👇