Bihar Police Viral Video: वर्दी में रील बनाकर फंसी सबाना आजमी | Bharat Ek Nayi Soch

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पूर्णिया, बिहार: खाकी वर्दी में इंस्टाग्राम रील्स बनाना पूर्णिया महिला थाना की पूर्व प्रभारी सबाना आजमी को महंगा पड़ गया है। पुलिस मुख्यालय के कड़े आदेश के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई ने पुलिस बल में अनुशासनहीनता पर बिहार पुलिस के सख्त रुख को साफ कर दिया है।

यह कार्रवाई बिहार पुलिस द्वारा चलाए जा रहे एक विशेष अभियान ‘ऑपरेशन रील’ का हिस्सा है। इस अभियान के तहत राज्य के 20 जिलों में तैनात लगभग 50 पुलिसकर्मी रडार पर हैं, जिन्होंने अपनी आधिकारिक वर्दी का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर रील्स बनाने के लिए किया है।

सवाल उठता है कि क्या वर्दी में वायरल रील्स बनाना गैरकानूनी है? पुलिस सेवा में रहते हुए सोशल मीडिया के इस तरह के उपयोग को लेकर ‘ऑल इंडिया सर्विस कंडक्ट रूल्स 1968’ क्या कहता है, यह जानना बेहद ज़रूरी है। ये नियम सरकारी कर्मचारियों के आचरण को विनियमित करते हैं, और वर्दी का दुरुपयोग नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाता है।

उत्तर प्रदेश पुलिस से लेकर दिल्ली तक, देश के कई राज्यों में पुलिसकर्मियों द्वारा रील्स बनाने पर सख्त पाबंदी लगाई गई है। इस तरह के कदमों का उद्देश्य पुलिस बल की गरिमा और अनुशासन को बनाए रखना है। वर्दी, जो जनता की सेवा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दी जाती है, उसका इस्तेमाल टिकटॉक या इंस्टाग्राम स्टार बनने के लिए होना चाहिए या नहीं, यह एक बड़ा नैतिक और पेशेवर सवाल है।

खाकी वर्दी एक पहचान है, जो कर्तव्य, सेवा और अनुशासन का प्रतीक है। सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत प्रसिद्धि के लिए इसका इस्तेमाल करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह पुलिस बल की सार्वजनिक छवि को भी धूमिल करता है। बिहार पुलिस का ‘ऑपरेशन रील’ इसी गंभीर मुद्दे पर लगाम लगाने की एक महत्वपूर्ण पहल है।

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40 Comments

  1. "दर्शकों, आपको क्या लगता है – क्या पुलिसवालों को वर्दी में सोशल मीडिया पर रील बनाने की आज़ादी होनी चाहिए, या फिर वर्दी का इस्तेमाल सिर्फ ड्यूटी और जनता की भलाई के लिए होना चाहिए? अपनी बेबाक राय हमें नीचे कमेंट में जरूर बताएं! 👇 देखते हैं कितने लोग 'ऑपरेशन रील' का सपोर्ट करते हैं!"

  2. Bihar me 35 persent resvarstion deke sarkar bahut galat kiya hy ma'am kash karke police me nahi dena chahiye police me larkiya ko sosan hota hy bihar me rooj koy na koy video viral hota hy ganda ganda

  3. अपराधी इसके खानदान के पहुंच से बाहर है बिहार में ये सब को घुस लेने से फुरसत मिलेगा तब ना दिक्कत है की ऐसे अधिकारी को नौकरी से बर्खास्त कर देना चाहिए

  4. बिहार में एक ची देखने के लिए मिला की फ्रॉड गिरी और फर्जी कागजात का काम बहुत होता है , गुंडा गर्दी तो है हि, चोर , रेपिस्ट बहुत है बिहार मैं

  5. बच्ची,है,ऐस,एच,ओ,कि, कुर्सी,पर,बैठाने,कि,भूल,कि,हे, आईन्दा,ऐसा, नहीं,करने,कि, हिदायत,दे,कर, नोकरी,से,बहाल,करें।x, police ajmer rajasthan

  6. अभी,तो,में, रिटायर्ड,हो,गया,में, पुलिस,चोकि,इन्चार्ज, देहली,गेट,था, पल्लवी,जी, आपको,जरूर,मेरी, कुर्सी,पर,तो, नहीं,पर,आफिस,में, कुर्सी,पर,बैठा,कर,आपका, अभिनन्दन,करता,और,पासके, दुकानदारों,को, बुलाकर, मिठाई,खिलाता।, आपका अजमेर,पधारने,का, सरगर्मी,से, स्वागत,करता।x, police,s,s, rathore

  7. अब बिहार सरकार तनख्वाह तो दे नहीं रही……तो थानेदार जी क्या करें 😀😀😀

  8. हर विभाग रील बनाता है सिर्फ इतना फर्क है कि पुलिस वर्दी में है जो पता चल जाता है

  9. पत्रकारिता में निष्पक्षता और संतुलन की आवश्यकता

    आज के समय में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब हर व्यक्ति तक जानकारी आसानी से पहुंच रही है, जिससे मीडिया और चैनलों की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य समाज को सच्ची, निष्पक्ष और संतुलित जानकारी प्रदान करना होना चाहिए।

    किसी भी मुद्दे को उठाना गलत नहीं है, बल्कि यह पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि कोई पुलिसकर्मी या अन्य व्यक्ति वर्दी में सोशल मीडिया पर अनुचित व्यवहार करता है, तो उस पर सवाल उठाना पूरी तरह उचित है। इससे व्यवस्था में सुधार आता है और जवाबदेही बनी रहती है।

    लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है जब किसी एक ही व्यक्ति, फोटो या वीडियो क्लिप को बार-बार दिखाकर उसे निशाना बनाया जाता है। ऐसा करने से पत्रकारिता की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं और दर्शकों के बीच एकतरफा सोच बन सकती है। समाज में विभिन्न समुदायों और वर्गों के लोग हैं, और यदि किसी विषय पर रिपोर्टिंग की जाती है, तो सभी पक्षों को समान रूप से दिखाना जरूरी है।

    कई बार देखा जाता है कि अलग-अलग समुदायों के लोग भी वर्दी में रहते हुए सोशल मीडिया पर सक्रिय होते हैं। ऐसे में केवल एक व्यक्ति या एक समुदाय पर ध्यान केंद्रित करना उचित नहीं है। पत्रकारिता का दायित्व है कि वह संतुलन बनाए रखे और किसी प्रकार के पक्षपात से बचे।

    अंततः, सच्ची पत्रकारिता वही है जो बिना भेदभाव के सभी तथ्यों को सामने लाए, समाज में जागरूकता बढ़ाए और सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करे। निष्पक्ष, जिम्मेदार और संतुलित पत्रकारिता ही लोकतंत्र की सच्ची ताकत होती है।

  10. तुमलोग को कोई काम नहीं, केवल मनगढ़ंत कहानी बना कर यूट्यूब चैनल चलाने वाले

  11. इनके ही कारण तो आपको भी भर भर के view mil raha है। दरोगा जी का अहसान मानिए

  12. ये बीमारी सारे देश की पुलिस को है बाकी सस्पेंड का मतलब है कि थोड़ी देर के लिए छुट्टी पर भेजना

  13. क्या इन्हें ट्रेनिंग नहीं दी जाती है कि कहां कैसे रहना चाहिए घर में, ड्यूटी में, थाने में परिवार में ट्रेनिंग देना चाहिए कुछ पुलिस व अधिकारी नेताओं विधायकों व सांसदों के पैर भी छूते हैं ।