Manoj Jha on Umar Khalid: “पिंजरे में बंद बुलबुल…” Umar के हक़ में दहाड़े सांसद!

राज्यसभा सांसद मनोज झा ने उमर खालिद के समर्थन में भरी हुंकार: "अगर पिंजरे में बंद बुलबुल गा सकती है…"

दिल्ली, [आज की तारीख]: देश की राजधानी दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद मनोज झा ने उमर खालिद की किताब के विमोचन के अवसर पर एक बेबाक और दमदार भाषण दिया। अपने संबोधन में उन्होंने उमर खालिद का पुरजोर समर्थन करते हुए कई ज्वलंत मुद्दों पर सरकार और स्थापित राजनीतिक दलों को घेरा।

अपने प्रभावशाली वक्तव्य में मनोज झा ने सीधे तौर पर उमर खालिद के संघर्ष और हौसले को सलाम किया। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से कहा, "अगर पिंजरे में बंद बुलबुल गा सकती है…", जो मौजूदा दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर मंडरा रहे खतरे और स्वतंत्र आवाजों को दबाने के प्रयासों पर एक तीखा कटाक्ष था।

झा ने अपने भाषण में सिर्फ उमर खालिद का पक्ष ही नहीं रखा, बल्कि आदिवासी इतिहास और मौजूदा राजनीति पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने देश में स्थापित राजनीतिक दलों की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनके बयानों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी और यह स्पष्ट संदेश दिया कि आजाद आवाजों को दबाने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।

मनोज झा का यह संबोधन उन आवाजों की तरफ ध्यान खींचता है, जिन्हें अक्सर दबाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने देश के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर अपनी बेबाक राय रखते हुए, निडर और सच्ची पत्रकारिता के महत्व को भी रेखांकित किया।

‘भारत एक नई सोच’ सच्ची और निडर ख़बरों के माध्यम से ऐसे महत्वपूर्ण राजनीतिक विमर्शों को लगातार आप तक पहुंचाता रहा है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे स्वतंत्र आवाजों को दबाने के खिलाफ संघर्ष लगातार जारी है।

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4 Comments

  1. सांसद मनोज झा ने जिस तरह से खुलकर उमर खालिद का समर्थन किया है, उस पर आपका क्या सोचना है? क्या आपको भी लगता है कि मौजूदा दौर में राजनीति की 'पिंजरे की बुलबुल' की आवाज़ को दबाना नामुमकिन है? अपनी राय हमें रिप्लाई में ज़रूर बताएं, हम आपके हर कमेंट को पढ़ रहे हैं! 👇🗣

  2. इस मे कोई दुविधा नहीं कि, की उमर खालेद एक मुसलमान स्कलार पिएच डि छात्र है, और बर्तमान हिन्दू बादी, मुस्लिम घोर बिरोधी सौकल,डालखिचडी सरकार मुसलमान देश के कुछ अवदान रक्षे ओइ से हम मुसलमान परम बीर चक्र आब्दुल हामीद, आसफाकुल्लाह, ब्रिगेडियर उसमानी, मिसाइल मेन ए पि जे आब्दुल कालाम जैसा सक्सियात हमारे मादारेवतान को निछावर किया, और तो और मादारेवतन को आग्रेँज चुगँल से आजाद करने के लिए 60000हाजार से ज्यादा मुसलमानों की कुरबानीया दी–जो आज भी दिल्ली के इन्डिया गेट पर उन का नाम दर्ज है, गोरे आग्रेँज तो हमने खदेड़ दिया, लेकिनउन्हहीँ के काले औलाद छोड़ गये थे ,हम भोले भाले जनता बैठा दिये जो होना चाहिए था, आज मासुल हम चुका रहे हैं,उमर खालेद सार्जिल इमाम जैसा बहुत सारे बहुत राज्यौँ में जेलके अन्दर सड़ रहै है।हम कब तक चुप रहे? मगर क्यौ? क्यो कि हम मुसलमान है इसलिए?