UP Panchayat Election 2026: ग्राम प्रधानों का लखनऊ में महाआंदोलन! House Arrest क्यों?
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DESCRIPTIONपंचायत चुनाव को लेकर लखनऊ में ग्राम प्रधानों का महाआंदोलन, अपनी ही सत्ता के ‘सेमीफाइनल’ में घिरी सरकार
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट के बीच सत्ता के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। 26 मई को प्रदेश के ग्राम प्रधानों का 5 साल का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, लेकिन चुनाव की कोई तारीख तय न होने से ग्राम प्रधानों में भारी रोष है। चुनाव में देरी और ‘प्रशासक राज’ के डर से उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों और 826 ब्लॉकों के ग्राम प्रधान लामबंद होकर लखनऊ की सड़कों पर उतर आए हैं।
ग्राम प्रधानों का आरोप है कि उन्हें धरने में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस बल का प्रयोग किया गया है। संगठन के नेताओं के मुताबिक, पिछले 48 घंटों में एक हजार से अधिक पदाधिकारियों, जिनमें ब्लॉक अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष शामिल हैं, को हाउस अरेस्ट किया गया है। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान बसों में भरकर और पुलिस की आंखों में धूल झोंककर लखनऊ पहुंचने में सफल रहे हैं।
ग्राम प्रधानों की नाराजगी सिर्फ चुनाव टलने या अपनी कुर्सी छिन जाने को लेकर नहीं है। उनका असली खौफ 26 मई के बाद लागू होने वाले ‘प्रशासक राज’ को लेकर है। प्रधानों का कहना है कि जब चुनाव नहीं होते हैं, तो गांव के विकास की चाबी एडीओ पंचायत या सेक्रेटरी जैसे सरकारी बाबुओं को सौंप दी जाती है। ग्राम प्रधानों का खुला आरोप है कि प्रशासक राज में गांव के विकास का पैसा फाइलों में दबकर रह जाता है और कमीशनखोरी अपने चरम पर होती है। उन्होंने कोविड काल का उदाहरण देते हुए बताया कि उस दौरान भी प्रशासकों की नियुक्ति के बाद बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और लूट-खसोट हुई थी।
सरकार की ओर से पंचायत चुनाव में देरी के कई कारण बताए जा रहे हैं। कभी बोर्ड परीक्षाओं का हवाला दिया जाता है, तो कभी 18 एमएलसी के चुनाव का। इसके अलावा, पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के लिए 6 महीने का समय मांगने की बात भी सामने आ रही है। लेकिन, जमीनी राजनीति को समझने वाले इन प्रधानों का मानना है कि यह सब एक साजिश का हिस्सा है। उनका कहना है कि सरकार एमएलसी चुनाव रूपी ‘सेमीफाइनल’ जीतने की तैयारी में है और इसलिए पंचायत चुनाव को दरकिनार कर रही है।
प्रधानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि चुनाव समय पर नहीं कराए गए और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला गया, तो वे गांव-गांव जाकर जनता के बीच इसका विरोध करेंगे। प्रधानों का कहना है कि वे ही विधायक और सांसद बनाते हैं, और अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में वे सरकार को उखाड़ फेंकने का काम करेंगे।
अब देखना यह होगा कि क्या सरकार 2027 के चुनावों से पहले जमीनी स्तर पर इन नेताओं की नाराजगी का जोखिम उठाती है, या फिर पंचायत चुनाव कराकर ‘प्रशासक राज’ के खतरे को टालती है। यह सत्ता का वह मोड़ है, जहां ग्राम प्रधान और नौकरशाही आमने-सामने आ गए हैं, और इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश की ग्रामीण राजनीति पर पड़ना तय है।


























क्या चुनाव होने तक मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक (Administrator) बनाये रखना सही फैसला होगा या फिर ADO पंचायत को जिम्मेदारी मिलनी चाहिए? आप लोगों के हिसाब से गांव के विकास के लिए क्या बेहतर है? अपनी बेबाक राय नीचे रिप्लाई में दें, हम हर कमेंट पढ़ रहे हैं! 👇🔥
कुल मिलाकर एडीओ पंचायत को चार्ज देने का फैसला एक सकारात्मक कदम होगा, वैसे तो इस लोकतान्त्रिक स्थानीय सरकार का ईश्वर बेहतरीन हाल जानते हैं, हम इंसानों के बस की बात नहीं है.
Very good only for Ban EVM,,, belet paper lao
BJP sarkaar police ko aage karke garibo ko dabata hai
Sab ko BJP ko vote diya ab saja bhugte raho
जागो bhi जागो caste ko छोड़ो मिल कर रहो
इसी तरह सरकार को विधायक चुनाव न होने पर पावर आईएएस अफसर को दे देना चाहिए
प्रशासक को गांव के बारे में क्या मालूम होता है
Prshasak hone chahiye
सबको अरेस्ट कर के सबसे पहले इनकी जांच करवाओ कौन कितना पैसा खाया है
Pardhan ne khub luta hai sarkari dhan ko
इन वर्तमान प्रधान को धरने में जाने की क्याजरूरत है 5 साल इनका पूरा हो चुका है सरकार को जो समझ में आए वह करें इन प्रधानों का कोई अधिकार नहींहै
Sarkar ka failure hai
मेरे हिसाब से माननीय मुख्यमंत्री जी को इन सभी प्रधानों का 5 साल के कार्यकाल की जांच करानी चाहिए ।इसके बाद देखिए कोई प्रधान धरना प्रदर्शन नहीं करेगा ।
5 साल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है तो किस लिए प्रधान जी लोग धरना प्रदर्शन कर रहे हैं ।5 साल तो खूब ढंग से जनता की सेवा किए ही है ।अब थोड़ा रेस्ट कर ले प्रधान जी लोग क्यों इतना परेशान है कार्यकाल बढ़ाने के लिए ।
Yogi G bekaar CM hein ye kabhi panchayat chunaav time par nahin kar paye.
Mera yogi baba se hath jodkar anurodh hai ki safed kurta walon ke pahle hisab liya jaaye yah log Kitna gaon ka Mal loot kar kha kar baithe
सही है चोरों को लाठियों से स्वागत किया जाए चोर आला अधिकारियों और शासन और प्रशासन पर bhrasthachar का आरोप लगा रहे हैं 😊😊😊
In logo ka karyakaal badha ke 25 saal kar diya jaye tab khus rahenge 5 saal tak kucch kiye nhi ab aur kucch din de diya jaye unko
सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा
Lokgeet jaanch honi chahie isliye yah baukhlae hue hain
Inko arrest Kiya jaye
Prdhan nhi jnta srkar bnati hai.
inhe arest karo aur jel bhejo baki panchayat chunav akhilesh sarkar karwaye gi
Pradhan Koi Kam nahin karte Sara Paisa kha jaate Hain nali karanja Koi Kam nahin hota Hai🎉🎉
Rith
tanasaha sarkar
Jai Shani Dev Shani Dham Fakir pur Baida Gopiganj BHADOHI.
U.P.
जमीं प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो गया है तो किस बात के लिए लोग गए हैं, दर्शन करने के लिए
Pradhan k vikas karya ki janch phle hona chahiye
Ye patrakar deshdrohi hai yahan bakwas kar rahi hai.
Sab pradhan chor hai
Ye. Sab. Lutere Pradhan hai
Jal rahi unki jo pardhani ki tayari kar rahe hi
अरे सरकार किसी से भी चलाए ग्राम पंचायत
👍🏻
सरकार से निवेदन है कि प्रधानों का कार्यकाल की जाँच कराई जाए
प्रधानों का कार्यकाल नहीं बढ़ाया जाय
जितना प्रधान से जनता का जुड़ाव होता है। उतना सरकारी मशीनरी से नहीं होता है।
ये सब प्रधान चोर है गांव में जाके जनता से सुनिए 5 साल में कुछ नहीं किया जनता का पैसा लूटा है प्रधानों ने
प्रशासक एडीओ पंचायत को बनाया जाए।। प्रधानों को प्रशासक नहीं बनना चाहिए 🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉
चुनाव चाहे दस साल बाद हो
Janta ne 5 saal ke liye chuna tha tab to kuchh kar nahi paye kewal apni pocket bhari hai bus