Viral Video: चोर पकड़ने के लिए तंत्र मंत्र करती पुलिस
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राजस्थान: चोरी की जांच में जब पुलिस ने तांत्रिक से मांगी मदद, हाई कोर्ट ने जांच अधिकारी को किया निलंबित
नागौर, राजस्थान: राजस्थान के नागौर से पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने वाली एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। एक महिला के घर में चोरी होने के बाद नागौर पुलिस ने वैज्ञानिक जांच के आधुनिक तरीकों को दरकिनार करते हुए, चोर का पता लगाने के लिए एक ‘तांत्रिक’ की मदद ली। इस अंधविश्वास भरे कदम ने न केवल न्याय प्रक्रिया को मज़ाक बनाया, बल्कि राजस्थान हाई कोर्ट की कड़ी फटकार का सामना भी करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, नागौर में एक महिला के घर में चोरी की वारदात हुई थी। पीड़िता न्याय की उम्मीद में पुलिस के पास पहुंची, जहाँ उसे आधुनिक "स्मार्ट पुलिसिंग" से सहायता की अपेक्षा थी। हालांकि, नागौर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और फिंगरप्रिंट जैसे वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्राथमिकता देने के बजाय एक अप्रत्याशित और अंधविश्वास भरा मार्ग अपनाया।
पुलिस ने कथित तौर पर चोर का पता लगाने के लिए एक तांत्रिक की सहायता ली। तांत्रिक ने बिना किसी ठोस सबूत या तर्क के, सीधे महिला के पिता को ही चोर घोषित कर दिया। हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने इस निराधार और अंधविश्वासी बयान को आधार बनाकर उसी दिशा में अपनी जांच शुरू कर दी।
जब अंधविश्वास और पाखंड का यह पूरा मामला राजस्थान हाई कोर्ट पहुंचा, तो न्यायधीशों ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने नागौर पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी फटकार लगाई और इसे आधुनिक न्यायिक प्रणाली के लिए एक गंभीर झटका बताया।
माननीय हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए, इस ‘तांत्रिक’ जांच में शामिल जांच अधिकारी को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि "डिजिटल इंडिया" के युग में न्याय तंत्र-मंत्र या अंधविश्वास से नहीं, बल्कि कानून और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मिलना चाहिए। यह घटना "स्मार्ट पुलिसिंग" के दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है और दर्शाती है कि पुलिस प्रणाली में अभी भी सुधार की कितनी आवश्यकता है।
‘भारत एक नई सोच’ की यह ग्राउंड रिपोर्ट सिस्टम की इस नाकामी का पूरा सच उजागर करती है। यह घटना सिर्फ नागौर पुलिस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश भर में पुलिस व्यवस्था के भीतर मौजूद ऐसी विसंगतियों को रेखांकित करती है। न्याय की उम्मीद में बैठे आम आदमी के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां अंधविश्वास और पाखंड से ऊपर उठकर निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से काम करें, ताकि जनता का उन पर विश्वास बना रहे।



















आपका इस खबर पर क्या सोचना है? जब हमारी पुलिस वैज्ञानिक जांच (CCTV, Fingerprints) छोड़कर तांत्रिकों और अंधविश्वास के सहारे काम करने लगे, तो क्या आम आदमी को कभी सही न्याय मिल पाएगा? अपने विचार कमेंट्स में जरूर साझा करें, और क्या आपने भी कभी पुलिस की ऐसी लापरवाही देखी है? आइए चर्चा करें! 👇
तान्त्रिक ही पुलिस को सुरक्षित रखते हैं मुर्ख औरत तुझे घमंड हो गया है और तुझे दंड भी मिल सकता है जय गुरुदेव