Lucknow में छात्राओं का सड़क जाम कर Protest करने की ऐसे मिली सजा? | Bharat Ek Nayi Soch
लखनऊ: ‘पढ़े तो पढ़े कैसे!’ सरकारी स्कूल में शिक्षकों की कमी, खराब भोजन और जातिगत भेदभाव से त्रस्त छात्राओं ने बारिश में जाम की सड़क
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय की सौ से अधिक छात्राओं ने बुधवार को मूसलाधार बारिश के बीच सड़क जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। इन बच्चियों का आरोप है कि स्कूल में न तो पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक हैं, न ही उन्हें सही भोजन मिल रहा है, और तो और, उन्हें जातिगत भेदभाव और छुआछूत जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पूरे दिन जारी भीषण बारिश के बावजूद, आक्रोशित छात्राएं अपनी मांगों को लेकर अडिग रहीं। उन्होंने ‘पढ़े तो पढ़े कैसे’ के नारे लगाए और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। छात्राओं के इस प्रदर्शन के कारण सड़क पर लंबा जाम लग गया, जिससे आम जनता को भी खासी परेशानी उठानी पड़ी।
छात्राओं ने बताया कि स्कूल में शिक्षकों की घोर कमी है, जिसके चलते उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। उनका भविष्य दांव पर लगा हुआ है, क्योंकि उन्हें बुनियादी शिक्षा के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। भोजन की गुणवत्ता भी एक बड़ा मुद्दा है। छात्राओं का कहना है कि उन्हें अक्सर कीड़े लगी दाल और जली हुई रोटियां परोसी जाती हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
सबसे गंभीर आरोप स्कूल परिसर के भीतर जातिगत भेदभाव और छुआछूत का है। छात्राओं ने बताया कि उनके साथ यह अमानवीय व्यवहार किया जाता है, जो न केवल संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाल रहा है।
यह घटना सरकारी स्कूलों में व्याप्त बुनियादी सुविधाओं की कमी और सामाजिक कुरीतियों की मौजूदगी को एक बार फिर उजागर करती है। ‘भारत एक नई सोच’ मांग करता है कि प्रशासन इस गंभीर मामले का संज्ञान ले और छात्राओं की समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करे, ताकि उन्हें सम्मानजनक शिक्षा और एक सुरक्षित माहौल मिल सके।






































































































































































































स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी और छात्राओं के साथ हो रहे जातिगत भेदभाव पर आपकी क्या राय है? क्या विज्ञापनों में दिखने वाला 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा ज़मीनी हकीकत से बिल्कुल अलग है? अपनी राय कमेंट में ज़रूर साझा करें और इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा में शामिल हों! 👇
सरकार के पास शिक्षा के लिए पैसा नहीं है और मन्दिरों कावड़ियों के लिए तो पूरा खजाना खोल दिया जाता है यह मनुवादी सरकार है शिक्षा से दूर रखना ही सरकार की प्राथमिकता है क्योंकि अशिक्षित रहेंगे तभी अंधभक्त बनेंगे
Ye jallad se kam nahein.hai
KAHETE HAM VISVAGURU HE YE,, BHAI SAMJ NHI ATA HAM KESE VISVAGURU HE? DANKA BJTA HE 🥱🤗
Haramraj ka hall
Kabariyo ke sava police hajir hoti hai mobile network books tution fees kaha se sarkar deti hai
PALLVI JI KI HIMAT KO SO SLAM🙏🙏🙏🤗