पूरे भारत में शुरू हुआ स्कूली बच्चों का प्रोटेस्ट, टीचर और प्रिंसिपल के खिलाफ खोला मोर्चा

देश के भविष्य सड़कों पर: सरकारी स्कूलों की बदहाली ने बच्चों को हक मांगने पर किया मजबूर!

नई दिल्ली: देश के सरकारी स्कूलों की जमीनी सच्चाई भयावह है। उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में छोटे-छोटे बच्चे अपना हक मांगने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। कहीं बुनियादी सुविधाओं की कमी है, तो कहीं दूषित भोजन और शिक्षकों के अभाव ने इन मासूमों को प्रदर्शन करने पर मजबूर कर दिया है। ‘भारत एक नई सोच’ की इस खास रिपोर्ट में हम आपको दिखा रहे हैं कि कैसे शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी हमारे देश के Gen Z और Gen Alpha पीढ़ी को प्रदर्शन करने पर मजबूर कर रही है।

फतेहपुर (यूपी): पंखे और पानी के लिए प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सरकारी स्कूलों के बच्चों को भीषण गर्मी में पंखों और पीने के साफ पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा। छात्रों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिससे उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। ये बच्चे सिर्फ बेहतर माहौल की मांग कर रहे हैं, जो उनका अधिकार है।

सीवान और गया (बिहार): मिड डे मील में कीड़े, SDM कार्यालय तक मार्च

वहीं, बिहार के सीवान और गया जिलों से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जो किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर सकती हैं। यहां सरकारी स्कूलों में मिड डे मील में कीड़े निकलने की शिकायतें आम हो चुकी हैं। गुस्साए बच्चों ने इस दूषित भोजन के खिलाफ आवाज उठाते हुए अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) कार्यालय तक मार्च निकाला। उनका सवाल है कि क्या उन्हें स्वस्थ और पौष्टिक भोजन का अधिकार नहीं है?

जालोर-बाड़मेर (राजस्थान): शिक्षकों की कमी से पढ़ाई ठप, छात्रों की हड़ताल

बात सिर्फ सुविधाओं या भोजन की नहीं, शिक्षकों की भी है। राजस्थान के जालोर और बाड़मेर जैसे जिलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण छात्रों को हड़ताल पर जाना पड़ा है। कई स्कूलों में लंबे समय से शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा का भविष्य अधर में लटक गया है। छात्र मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, ताकि उनकी पढ़ाई सुचारु रूप से चल सके।

शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल: Gen Z और Gen Alpha मांग रहे अपना हक

ये घटनाएं केवल कुछ जिलों की नहीं, बल्कि देशव्यापी शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का प्रतीक हैं। Gen Z और Gen Alpha के ये युवा अब चुपचाप अन्याय सहने को तैयार नहीं हैं। वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और सिस्टम से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या हमारे देश के उन बच्चों को, जो सरकारी स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं, बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलनी चाहिए?

यह समय है कि सरकारें और संबंधित विभाग इन बच्चों की आवाज को गंभीरता से सुनें और इन मूलभूत समस्याओं का तत्काल समाधान करें। अगर देश का भविष्य ही इस तरह सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा, तो हम एक मजबूत और शिक्षित समाज की कल्पना कैसे कर सकते हैं?

Show More

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1 Comment

  1. आपके इलाके के सरकारी स्कूलों (Government Schools) का क्या हाल है? क्या वहां भी बच्चों को 'टीचर, पानी और पंखे' जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ता है? अपने गाँव/शहर का नाम और स्कूल का हाल कमेंट करके जरूर बताएं, हम आपकी बात पढ़ेंगे! 👇💬