Yogi का UP Chunav 2027 में पत्ता काटने की BJP में तैयारी? | Bharat Ek Nayi Soch
CM सिटी गोरखपुर में ‘डबल इंजन’ के दावों की खुली पोल: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्रों के बदहाल हॉस्टल और ‘टिफिन’ घोटाले पर उठाए गंभीर सवाल
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह क्षेत्र गोरखपुर, जिसे अक्सर विकास और सुशासन का मॉडल बताया जाता है, वहां की ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। हाल ही में आयोजित गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में खुद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रशासन और सुशासन के दावों की कलई खोल दी।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में साफ शब्दों में कहा कि जहां एक ओर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर छात्रों को मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के हॉस्टलों की दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की, जो सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन और व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छात्रों के हॉस्टलों में पीने के पानी की किल्लत, अनियमित बिजली आपूर्ति और मेस की खराब व्यवस्था जैसी शिकायतें आम हैं। ये बुनियादी सुविधाएं भी विद्यार्थियों को नसीब नहीं हो रही हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राज्यपाल ने हॉस्टलों में ‘टिफिन’ के नाम पर चल रहे कथित गोरखधंधे पर गंभीर चेतावनी जारी की। उन्होंने इस मामले को सुशासन पर एक बड़ा धब्बा बताया और संबंधित अधिकारियों को इस पर तत्काल ध्यान देने के निर्देश दिए।
यह स्थिति तब है जब स्थानीय सांसद रवि किशन जैसे नेता गोरखपुर को ‘स्पेन’ से तुलना कर विकास के बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकते। सवाल उठता है कि मुख्यमंत्री के अपने गढ़ में, जहां ‘डबल इंजन सरकार’ का नारा बुलंद किया जाता है, वहां छात्रों को पीने के पानी और बिजली जैसी बुनियादी सहूलियतें भी क्यों नहीं मिल पा रही हैं?
राज्यपाल की इस तीखी टिप्पणी ने न केवल विश्वविद्यालय प्रशासन बल्कि पूरे स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि इस गंभीर चेतावनी के बाद छात्रों की बदहाली को दूर करने और कथित ‘टिफिन’ घोटाले की जांच के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, या फिर विकास की चमक सिर्फ विज्ञापनों तक ही सीमित रहेगी।



























































































































































आपको क्या लगता है, सीएम सिटी गोरखपुर में ऐसी बदहाली के लिए असल में ज़िम्मेदार कौन है—सिस्टम, अधिकारी या खुद प्रशासन? अपनी राय नीचे कमेंट्स में ज़रूर बताएं, हम आपके हर एक विचार को पढ़ रहे हैं! 👇
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