Cockroach Janta Party के School Thik Karo अभियान में शामिल कार्यकर्ता को मिला कफ़न |

बांकुड़ा में शिक्षा की मांग पर मिला ‘कफ़न’: अब्दुल हफीज के पिता की निर्मम हत्या, बंगाल में उबाल!

बांकुड़ा, पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी पर गहरा चोट पहुंचा है। एक जर्जर सरकारी स्कूल की सच्चाई उजागर करने की कीमत एक युवा को अपने बुजुर्ग पिता की जान देकर चुकानी पड़ी है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े अब्दुल हफीज ने जब अपने गांव के बदहाल स्कूल की दयनीय स्थिति को सामने लाने की कोशिश की, तो सत्ता के ठेकेदारों को यह रास नहीं आया।

रिपोर्ट के अनुसार, गुंडों ने अब्दुल हफीज के घर पर बर्बर हमला कर दिया। न सिर्फ उनके सोशल मीडिया से वीडियो को जबरन डिलीट करवाया गया, बल्कि उनके बुजुर्ग पिता को इतनी बेदर्दी से पीटा गया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। दुःखद रूप से, 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर, उनके पिता ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।

यह घटना देश के शिक्षा तंत्र पर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है: क्या इस देश में शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करना इतना बड़ा गुनाह है? शिक्षा की मांग करने पर कफ़न क्यों मिल रहा है? यह प्रश्न आज बांकुड़ा से लेकर पूरे बंगाल तक गूंज रहा है, जिसने आम जनमानस को झकझोर कर रख दिया है।

इस जघन्य अपराध पर सत्ता पक्ष और विपक्ष, भाजपा और तृणमूल कांग्रेस, दोनों की चुप्पी या फिर सिर्फ बयानबाजी सवालों के घेरे में है। राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का खेल जारी है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि एक परिवार ने सच बोलने की कीमत चुकाई है।

क्या अब्दुल हफीज के परिवार को न्याय मिल पाएगा? क्या शिक्षा के अधिकार के लिए आवाज़ उठाने पर ऐसे ही बर्बर हमले जारी रहेंगे? इन सभी सवालों का जवाब जानने के लिए देखिए पल्लवी राय की ये तीखी और खास रिपोर्ट, सिर्फ भारत एक नई सोच पर।

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3 Comments

  1. बांकुड़ा की इस दर्दनाक घटना पर आप किसे सबसे ज्यादा जिम्मेदार मानते हैं – बेखौफ गुंडाराज को, सिस्टम की खामोशी को, या इस पर हो रही गंदी राजनीति को? अपनी राय नीचे कमेंट में जरूर लिखें, हम आपके हर एक कमेंट को पढ़ रहे हैं। 👇

  2. हमारे गांव के जितने भी गवर्नमेंट स्कूल है सभी की टपक रही है यहां तक की एक स्कूल की छत गिर भी गई, जिसमें कुछ बच्चे घायल भी हो गए. लेकिन इस बात पर कोई प्रशासन आवाज नहीं उठा रहा है. हम कासगंज के सोरों से हैं