प्रोटेस्ट खराब करने पहुंचे अंधभक्त, भीड़ गए हमारे पत्रकार से | Bharat Ek Nayi Soch
रांची के मोहराबादी में गरमाया छात्र आंदोलन: क्या धर्म और राजनीति की हो गई है एंट्री?
रांची, [आज की तारीख]: रांची के मोहराबादी मैदान में छात्रों का आधी रात को भी प्रदर्शन जारी रहा। ‘भारत एक नई सोच’ की टीम ने मौके पर पहुंचकर आंदोलन कर रहे छात्रों से सीधी बातचीत की, जहां प्रदर्शन के स्वरूप को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए।
हमारी टीम से बातचीत के दौरान एक प्रदर्शनकारी छात्र ने चौंकाने वाला दावा किया। उसका आरोप है कि इस छात्र आंदोलन में 90% बाहरी लोग और विभिन्न राजनीतिक दल शामिल हो गए हैं। इस बयान ने मौके पर मौजूद अन्य छात्रों के साथ एक तीखी बहस को जन्म दिया।
वहीं, बड़ी संख्या में अन्य छात्र इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए आंदोलन को पूरी तरह से शांतिपूर्ण और छात्र-हित में बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह छात्रों की अपनी आवाज है, जिसमें कोई बाहरी हस्तक्षेप नहीं है।
यह विरोधाभासी स्थिति गंभीर सवाल खड़े करती है: क्या सचमुच झारखंड के इस महत्वपूर्ण छात्र आंदोलन में धर्म और राजनीति की एंट्री हो चुकी है? छात्रों के बीच ही इस मुद्दे पर गहरे मतभेद देखने को मिल रहे हैं।
मोहराबादी के मैदान से आ रही यह खबरें बताती हैं कि छात्रों के इस एकजुटता पर संदेह के बादल मंडरा रहे हैं। ‘भारत एक नई सोच’ इस पूरे मामले की तह तक जाकर सच्चाई सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संवाददाता संध्या राय (पल्लवी राय) ने मौके से इस स्थिति का जायजा लिया।






































































































































































































"आपको क्या लगता है, छात्रों के इस आंदोलन में बाहरी लोगों और राजनीतिक पार्टियों का कितना हाथ है? क्या वाकई आंदोलन को भटकाने की कोशिश हो रही है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं 👇"
YE AADMI BJP RSS. KA. BHEJA GAYA DALAL HAI ESE BHAGAYA JAI BHIM JAI FULE JAI MANDAL JAI PERIYAR JAI JAGDEV PRASAD KUSWAHA. JAI SAMVIDHAN
यहाँ छात्रों ने बिल्कुल सही कहा है,पत्रकार द्वारा छात्रों के मुद्दे को दूसरे आंदोलन से तुलना कर गुमराह किया जा रहा है ।
प्रोटेस्ट स्थल में जितने भी छात्र है सबसे विनम्र निवेदन है कि ऐसे पत्रकारों से दूरी बनाए रखे ,ये मुद्दे दूसरे आंदोलन से तुलना कर के भटकाकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे है….।