Jharkhand Student Protest: इतिहास बदल देंगे! संविधान की कसम खाकर छात्रों ने दी सरकार को चेतावनी
झारखंड में ‘पेपर लीक’ का भयंकर बवाल: 15 दिन से भूख हड़ताल पर छात्र, न्याय की गुहार; क्या सरकार सुनेगी पुकार?
रांची, झारखंड: झारखंड की राजधानी रांची में इन दिनों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है। राज्य में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित पेपर लीक घोटाले के खिलाफ छात्रों का भयंकर आक्रोश देखने को मिल रहा है। पिछले पंद्रह दिनों से अधिक समय से सैकड़ों की संख्या में युवा अपना घर-बार छोड़कर सड़क पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं, बावजूद इसके प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
रांची की सड़कों पर यह मंजर दिल दहला देने वाला है, जहां देश का भविष्य माने जाने वाले होनहार छात्र बिना खाए-पिए अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी आंखों में निराशा है, लेकिन जुबान पर अपने हक के लिए लड़ने का संकल्प साफ झलकता है। प्रीति कुमारी जैसी कई छात्राएं, जो अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रही हैं, व्यवस्था पर सवाल उठा रही हैं।
सिस्टम की इस धांधली के खिलाफ छात्र सिर्फ नारेबाजी नहीं कर रहे, बल्कि एक अनोखे और सशक्त तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। हमारी ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, ये युवा भारत के संविधान की प्रस्तावना पढ़कर अपने हक की मांग कर रहे हैं। यह उनकी साफ चेतावनी है कि वे संविधान प्रदत्त अधिकारों के तहत न्याय चाहते हैं और इसे हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सवाल उठता है कि आखिर झारखंड सरकार इन युवाओं की पुकार क्यों नहीं सुन रही है? क्या इन होनहार छात्रों का दर्द नेताओं के लिए सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा बनकर रह गया है? पेपर लीक की इस हकीकत ने हजारों परिवारों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है और राज्य के युवाओं में भारी अविश्वास पैदा कर दिया है। प्रशासन की चुप्पी इस पूरे मामले को और भी गंभीर बना रही है।
‘भारत एक नई सोच’ की टीम सीधे रांची के ग्राउंड जीरो से यह रिपोर्ट लेकर आई है, जहां छात्रों का संघर्ष और उनकी वेदना स्पष्ट है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या झारखंड सरकार इन युवा अभ्यर्थियों की मांगें मानकर उनके भविष्य को सुरक्षित करती है या फिर यह मुद्दा भी सिर्फ कागजों और बयानों में दबकर रह जाएगा। न्याय की यह लड़ाई हर उस छात्र की है, जो ईमानदारी से मेहनत करके अपना भविष्य बनाना चाहता है।






































































































































































































Jad me to pichhle 70saalon se har pay commission me sarkari naukari me post ka Surender krne ka niyam tha jo aaj mahavisfot berojgaari bn k ubhra h. Hona y chahiye tha ki aabadi badhne k saath no of post badhani chahiye thi to y berojgaari ki dikkat na aati jo visfotak bn gyi h.