Jantar Mantar से छात्रों ने किया बड़ा ऐलान, Bharat Ek Nayi Soch
जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस का बर्बर तांडव: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, छात्राएं बदसलूकी की शिकार
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस की बर्बरता का एक भयावह मंज़र देखने को मिला। ‘भारत एक नई सोच’ की इस एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट में हमने देखा कि कैसे न्याय की गुहार लगा रहे युवाओं पर लाठियां बरसाई गईं, जिससे पूरा इलाका रणभूमि में तब्दील हो गया।
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में जंतर-मंतर पर जुटे ये युवा हाथों में ‘संविधान बचाओ’ लिखी किताबें लिए न्याय की मांग कर रहे थे। उनकी मुख्य मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा शामिल है। लेकिन उनकी आवाज को दबाने के लिए पुलिस ने अमानवीयता की सारी हदें पार कर दीं।
हमारी रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं के साथ ऐसी बदसलूकी की, जिसे देखकर किसी की भी रूह काँप जाए। छात्राओं के साथ धक्का-मुक्की की गई और उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। वहीं, कई छात्रों के सिर फोड़ दिए गए और वे लहूलुहान होकर ज़मीन पर गिर पड़े।
प्रदर्शनकारी छात्रों का दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने गुस्से और हताशा में कहा, "हम आतंकवादी नहीं हैं, हम तो बस अपने भविष्य के लिए न्याय मांग रहे हैं।" इस दौरान पुलिस ने बल प्रयोग में कोई कसर नहीं छोड़ी और छात्रों को घसीट-घसीट कर हिरासत में लिया गया।
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे इन युवाओं के साथ दिल्ली पुलिस का यह बर्बर रवैया क्यों? क्या छात्रों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार नहीं है? क्या सरकार और पुलिस युवाओं की जायज मांगों को दबाना चाहती है? यह पूरी सच्चाई एक बार फिर पुलिस बल के अत्यधिक इस्तेमाल और युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिसका जवाब सरकार को देना होगा।







































































































