प्रिंसिपल ने स्कूल से मां समेत बच्चों को जलील कर बाहर निकला | Bharat Ek Nayi Soch

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शिक्षा के मंदिर में ‘शट अप’ का अपमान: प्राइवेट स्कूल माफिया की लूट, क्या अब सिर्फ ‘धंधा’ है शिक्षा?

नई दिल्ली: देशभर में शिक्षा के निजीकरण और निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में इंटरनेट पर वायरल हुए एक वीडियो ने इन सवालों को और भी गहरा कर दिया है, जिसमें एक स्कूल की प्रिंसिपल सरेआम एक छात्रा की माँ को ‘Shut up’ कहकर बेइज्जत करती दिख रही हैं। यह घटना शिक्षा के मंदिरों में पनप रहे ‘धंधा’ और ‘व्यापार’ के कड़वे सच को उजागर करती है। ‘भारत एक नई सोच’ की विशेष रिपोर्ट में पल्लवी राय ने शिक्षा माफिया की इसी गुंडागर्दी का पर्दाफाश किया है।

यह शर्मनाक घटना स्कूल फीस के मुद्दे और किताबों-यूनिफॉर्म के नाम पर होने वाली ‘लूट’ का सीधा परिणाम है। पीड़ित अभिभावक अपनी बेटी की फीस या अन्य खर्चों को लेकर बात करने पहुंची थीं, लेकिन उन्हें अपमान और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। प्रिंसिपल का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया निजी स्कूलों में अभिभावकों के प्रति बढ़ते अनादर को दर्शाता है, जहाँ शिक्षा प्रदान करने की बजाय व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।

मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। महंगी फीस, अनिवार्य और अक्सर ऊँची कीमतों पर बेची जाने वाली किताबें तथा यूनिफॉर्म ने उनकी कमर तोड़ दी है। स्कूल फीस बढ़ोतरी और मनमानी वसूली के खिलाफ आवाज उठाने वाले अभिभावकों को अक्सर इसी तरह के अपमान और उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है। ‘पेरेंट्स इंसल्ट इन स्कूल’ या ‘प्रिंसिपल इंसल्ट पेरेंट्स’ जैसी घटनाएँ अब आम बात होती जा रही हैं।

‘भारत एक नई सोच’ की टीम ने इस गंभीर मुद्दे की तह तक जाने की कोशिश की है। सवाल उठता है कि आखिर क्यों शिक्षा के पवित्र स्थानों पर अभिभावकों का अपमान एक सामान्य घटना बन गया है? क्यों निजी स्कूल खुलेआम मनमानी करते हुए ‘शिक्षा माफिया’ का रूप ले रहे हैं? यह ‘प्राइवेट स्कूल फीस हैरेसमेंट’ पूरे देश की शिक्षा प्रणाली के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है।

शिक्षा प्रणाली में सुधार और इन ‘स्कूल माफिया’ के खिलाफ एक मजबूत आवाज़ बुलंद करने की आज सख्त ज़रूरत है। हमारी यह रिपोर्ट अभिभावकों से अपील करती है कि वे अपने अनुभवों को साझा करें और इस लूट के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों, ताकि भारत के शिक्षा तंत्र में एक सकारात्मक बदलाव लाया जा सके और शिक्षा के असली मायने फिर से स्थापित हो सकें।

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27 Comments

  1. "दोस्तों, क्या आपके बच्चों के स्कूल में भी किताबों, ड्रेस और एडमिशन फीस के नाम पर इसी तरह की लूट मची हुई है? क्या आपने या आपके किसी जानने वाले ने भी प्राइवेट स्कूलों की ऐसी गुंडागर्दी का सामना किया है? अपना अनुभव हमारे साथ कमेंट्स में शेयर करें, हम आपकी आवाज़ पढ़ रहे हैं! 👇🙏"

  2. ऐसे लोगों को चिह्नित करके पद से हटा देना चाहिए ए लोग निचले जाति वालों को पढ़ा लिखा नहीं देख सकते ये इन लोगों की मानसिकता है

  3. Close this school…she has no rights to talk about parent like this… she should be fired and charged criminally to talk to the parents like on high tone and saying SHUT UP SHUT UP SO MANY TIMES AND DIDNOT LET THE MOTHER SPEAK AT ALL TO LISTEN TO HER IS COMPLETELY DIFFERENT MATTER BUT HARSH WORD USING TO A MOTHER OF A CHILD “UNBELIEVABLE “….. she should be fired and jailed immediately…..

  4. Bharat nayi soch ki mam ko Awards milney chahiye….her points are always right and she speaks the truth…I hope her voice should be heard and those leaders should take action instead of just ignore this serious problems with the principal of this school…. For me legally she is not qualified to be a teacher or principal and she should be fired immediately…. If not the system is completely corrupted…. No voices for parents and students…. She proved that schools are money making machines….

  5. घटना की एकमात्र किरदार प्रिंसिपल ममता मिश्रा को मानना भी ठीक नहीं है। निजी स्कूलों को संचालित करने के लिए नियमावली उनका मैनेजमेंट बनाता है और प्रिंसिपल के माध्यम से स्कूल में लागू करवाता है। टीचर और अन्य स्टाफ के सहयोग से स्कूल की प्रिंसिपल उन नियमों को विद्यालय में लागू करवाते हैं। लागू न करवाने पर स्कूल का मेनेजमेंट प्रिंसिपल से नाराज़ हो जाता है। देखा जाय तो हरदोई की प्रिंसिपल अकेले उस घटना की जिम्मेवार नहीं है। हां प्रिंसिपल का व्यवहार अमानवीय जरुर दिखता है। उसकी भरपूर सजा प्रिंसिपल मैडम को जरुर मिलनी चाहिए। अब दिए गए सभी स्पष्टीकरण बचने के बहाने के सिवाय और कुछ नहीं है। निजी स्कूलों ने जो लूट मचा रखी है उस पर सरकार और समाज दोनों विचार करें। कर्मचारी तो अपने बास के आर्डर का पालन मात्र करता है।

  6. इस प्रिंसिपल का स्कूल बंद करो प्रिंसिपल को केवल दो शब्द आते हैं सेंट अप प्रिंसिपल गंवार है याह क्या ज्ञान देगी😠😠🚩🚩🚩🚩

  7. Up ka cm योगी जी से निवेदन है इस औरत को सही इलाज होना चाहिए ये पूरा भारत देख रहा है जो इस औरत का नहीं CM का बदनाम हो रहा है योगी जी आपका पुलिस या बुलडोजर कहा है इस औरत को अगर कुछ नहीं किया तो और स्कूल में भी यही हाल हो गा की आपका बुलडोजर मुस्लमान के लिए है आपसे निवेदन है कि इस औरत को क्या किया जाय