Sonam Wangchuk Hunger Strike Jantar Mantar: सोनम वांगचुक की सेहत बिगड़ी | Bharat Ek Nayi Soch

लद्दाख की आवाज़: 19 दिनों से आमरण अनशन पर सोनम वांगचुक, मोदी सरकार का मौन और बिगड़ती सेहत के बीच गहराते सवाल

दिल्ली, [आज की तारीख]: राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर देश की सामूहिक चेतना को झकझोर रहा है। मशहूर शिक्षाविद और लद्दाख की आवाज़ सोनम वांगचुक पिछले 19 दिनों से यहां आमरण अनशन पर बैठे हैं, जिनकी सेहत लगातार गिरती जा रही है, लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर सरकार का मौन हैरान करने वाला है।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, वांगचुक का वजन 9 किलो घट चुका है। उनका यूरिक एसिड खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है और उनकी शारीरिक हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है, लेकिन इस गिरते स्वास्थ्य के बावजूद उनका संकल्प अटल है।

इस पूरे मामले पर मोदी सरकार की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। क्या सरकार एक ऐसे व्यक्तित्व की जान से खेल रही है, जो लद्दाख के पर्यावरण और भविष्य के लिए संघर्ष कर रहा है? "सेव लद्दाख" (Save Ladakh) मुहिम को लेकर केंद्र का यह रवैया कई आशंकाओं को जन्म देता है।

आश्चर्यजनक रूप से, देश की मुख्यधारा की मीडिया भी इस जन-आंदोलन को लेकर लगभग पूरी तरह से चुप है। लद्दाख के भविष्य और एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद के जीवन से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे को वह कवरेज नहीं मिल पा रही, जिसकी यह हकदार है। यह चुप्पी पत्रकारिता के मूल्यों पर भी सवाल खड़े करती है।

वांगचुक लद्दाख के पर्यावरण, संस्कृति और विशिष्ट पहचान को बचाने के लिए केंद्र सरकार से संवैधानिक सुरक्षा (छठी अनुसूची) की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि वर्तमान नीतियां लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय आबादी के लिए खतरा बन रही हैं, जिसके खिलाफ वे अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।

इस गंभीर स्थिति के बीच, 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यह देखना बाकी है कि क्या यह मार्च इस आंदोलन को कितनी नई ऊर्जा दे पाता है और क्या यह सरकार की चुप्पी तोड़ने में सफल होगा।

सवाल सिर्फ सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि लद्दाख के भविष्य और लोकतांत्रिक मूल्यों का भी है। ‘भारत एक नई सोच’ (Bharat Ek Nayi Soch) मानता है कि लद्दाख की यह पुकार पूरे देश तक पहुंचनी चाहिए और सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।

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1 Comment

  1. "दोस्तों, सोनम वांगचुक जी पिछले 19 दिनों से लद्दाख और हमारे पर्यावरण के लिए अपनी जान की बाज़ी लगाए बैठे हैं, लेकिन मीडिया और सरकार दोनों चुप हैं। आपको क्या लगता है, सरकार का यह रवैया कितना सही है? क्या 20 जुलाई को जनता का 'संसद मार्च' सरकार की नींद तोड़ पाएगा? अपने विचार नीचे कमेंट्स में जरूर बताएं, हम आपके हर कमेंट को पढ़ रहे हैं! 👇👇"