Sonam Wangchuk Hunger Strike Jantar Mantar: सोनम वांगचुक की ये बाते सरकार क्यों छिपाई ।

जंतर-मंतर पर लद्दाख की पुकार: सोनम वांगचुक का अनशन और अनसुनी ‘छठी अनुसूची’

दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े आंदोलन का गवाह बन रहा है। लद्दाख के जाने-माने शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन लगातार जारी है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस आंदोलन के बीच, कई ऐसे गंभीर मुद्दे हैं जिन्हें मुख्यधारा में वो जगह नहीं मिल रही है जिसके वे हकदार हैं। ‘भारत एक नई सोच’ इस विश्लेषण में उन छिपी हुई सच्चाइयों को सामने लाएगा, जिन्हें देश की जनता को जानना बेहद जरूरी है।

आखिर जंतर-मंतर पर क्यों बैठे हैं वांगचुक?

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के इस विरोध का मुख्य केंद्र बिंदु लद्दाख का भविष्य और वहां के नाजुक पर्यावरण की सुरक्षा है। वांगचुक लगातार यह मांग कर रहे हैं कि लद्दाख के अनूठे इकोसिस्टम और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। यह केवल एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं है, बल्कि यह लद्दाख की उस आवाज़ का प्रतिनिधित्व करता है जिसे बार-बार नजरअंदाज किया जा रहा है। सरकार के रवैये और उनके द्वारा उठाए जा रहे कदमों को लेकर वांगचुक ने कई ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जिन पर सरकार स्पष्ट जवाब देने से बच रही है।

क्या हैं उनकी प्रमुख मांगें?

सोनम वांगचुक की मांगों का सीधा संबंध लद्दाख को मिलने वाले संवैधानिक अधिकारों से है। उनके इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल कराना है, जो वहां के जनजातीय समुदायों को विशेष अधिकार और स्वायत्तता प्रदान करेगी।

इसके अलावा, उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • लद्दाख के पर्यावरण और तेजी से पिघलते ग्लेशियरों का संरक्षण।
  • स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और भूमि अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था स्थापित करना और सिस्टम की जवाबदेही तय करना।

वांगचुक लगातार इन अहम मुद्दों को उठा रहे हैं, लेकिन आरोप है कि सरकार इन वास्तविक समस्याओं को जनता की नजरों से छिपाने का प्रयास कर रही है।

सरकार की खामोशी के पीछे का सच

सोनम वांगचुक और सरकार के बीच का यह गतिरोध इस समय सोशल मीडिया और न्यूज़ पोर्टल्स पर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय है। वांगचुक जैसे विश्व-प्रसिद्ध व्यक्ति (जिन्हें मैग्सेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है) के लगातार अनशन पर बैठने के बावजूद, केंद्र सरकार की ओर से कोई भी ठोस पहल या सीधा संवाद स्थापित न होना कई सवाल खड़े करता है। राजनीतिक गलियारों से मिली जानकारी के अनुसार, कई विपक्षी नेताओं ने भी सरकार की इस चुप्पी पर निशाना साधा है, लेकिन मुख्य मांगों पर अभी भी एक तरह का पर्दा पड़ा हुआ है।

लगातार अनशन से बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति

जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति लगातार नाजुक होती जा रही है। खाना-पीना त्याग देने की वजह से उनके शरीर का वजन तेजी से गिर रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर चेतावनी दी है कि यदि यह अनशन ऐसे ही जारी रहा, तो उनके शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर सकते हैं। इसके बावजूद, उनका हौसला नहीं टूटा है और वे अपने सत्याग्रह पर अडिग हैं, लद्दाख के भविष्य के लिए एक मजबूत संदेश देते हुए।

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4 Comments

  1. मान लिया वांगचुक अच्छा आदमी नहीं है, कमीना आदमी है (हालांकि इतने दिन की सच्ची भूख हड़ताल के बाद कोई बिल्कुल ही शैतान होगा तो होगा, उसको देख कर तो ऐसा नहीं लगता) फिर भी उसकी मांग तो मान के देख लो। एजूकेशन सिस्टम की सुधार ही बोल रहा है, उससे कोई एटम बम तो नहीं बन जाएगा। ये सत्ता का अहंकार नहीं है तो क्या है? ये कांग्रेस की हार नहीं है तो क्या है?
    ये पॉलिटिकल एनवायरनमेंट था इससे पहले कभी भारत में ? जनता की जवाबदेही कहां गई? मर गई? आदमी है भूखा है बम नहीं बना रहा है एडुकेशन सिस्टम को सुधारने के लिए ही बोल रहा है? अच्छा है न? आपके मेनिफेस्टो की ही बात है। जनता भी अलग अलग समय पर इस बात पर विरोध कर चुकी है। स्टूडेंट्स भी कई प्रोटेस्ट के बाद थक गए ह

  2. प्लीजमैडम जी आप सभी पत्रकार भाई बहनों से निवेदन है हाथ जोड़कर आप सभी लोग उनको समझाइए सोनम जी को उनके शरीर उनका समर्थन बहुत कीमती बहुत मूल्यवान है इसलिए अपने समर्थन को मजबूत करने के लिए बच्चों के सहयोग में खड़ा होने के लिए अन्य ग्रहण करें भले ही समर्थन में चाहे महीना 2 महीना बैठे रहे शरीर को मजबूत बनाएं उनका मजबूत रहना सभी लोगों के लिए बहुत जरूरी है