CJP Protest Jantar Mantar: पेपर लीक से बर्बाद होता भविष्य! 72 साल की दादी का दर्द सुनिए

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जंतर मंतर पर लोकतंत्र की अनूठी तस्वीर: शिक्षा और रोजगार पर सवाल उठाती 10 साल के बच्चों से लेकर 72 वर्षीय बुजुर्गों की आवाज़

दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन ने आज लोकतंत्र का एक बेहद अलग और खूबसूरत पहलू सामने रखा है। यहाँ NTA पेपर लीक और देश की बदहाल शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ एक व्यापक जन आंदोलन देखने को मिला, जिसमें न केवल छात्र बल्कि समाज के हर तबके के लोग अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए सड़कों पर उतरे।

आंदोलन स्थल पर 10 साल के छोटे बच्चों से लेकर 72 साल तक की बुजुर्ग महिलाओं की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह केवल छात्रों का नहीं, बल्कि पूरे समाज का मुद्दा बन चुका है। अपनी मांगों और अधिकारों के लिए एकत्रित हुई यह भीड़ देश के भविष्य और वर्तमान दोनों की चिंता को दर्शाती है।

इस ग्राउंड रिपोर्ट में हमने देखा कि कैसे कई अभिभावक अपने छोटे बच्चों को लेकर धरने पर पहुंचे थे। एक पिता ने बताया कि वे अपने बच्चों को यह सिखाने आए हैं कि उन्हें अपने हक़ के लिए कैसे लड़ना है। यह बताता है कि आज की पीढ़ी अपने बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा भी दे रही है।

आंदोलन में शामिल एक बुजुर्ग नागरिक ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब देश की आवाम शिक्षा और रोजगार जैसे मूलभूत मुद्दों पर सवाल उठाती है, तो उन्हें अक्सर आतंकवादी या पाकिस्तानी कहकर चुप करा दिया जाता है। उनकी यह टिप्पणी वर्तमान राजनीतिक माहौल में आम जनता की निराशा और गुस्से को उजागर करती है।

NEET विवाद और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने आम जनता के मन में सरकार के प्रति गहरे अविश्वास को जन्म दिया है। सड़कों पर उतरे लोग सवाल कर रहे हैं: क्या देश में शिक्षा से ज्यादा मंदिर और राजनीति जरूरी हो गई है? क्या युवा पीढ़ी के भविष्य से खिलवाड़ कर देश प्रगति कर सकता है? ये प्रश्न अब केवल आंदोलनकारियों के नहीं, बल्कि पूरे देश के मन में गूंज रहे हैं।

जंतर मंतर पर उमड़ा यह जनसैलाब सिर्फ NTA पेपर लीक के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन और सरकार से जवाबदेही की मांग है। यह दर्शाता है कि जब देश का भविष्य दांव पर होता है, तो लोकतंत्र अपनी सबसे सशक्त आवाज़ के साथ सड़कों पर उतर आता है।

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30 Comments

  1. एक इस्तीफा पूरी सड़ी सिस्टम बदल नहीं सकता,

    बिना बैलट पेपर, और आधार वोटर के इलेक्शन –

    कितना भी अनशन करो बदलाव नहीं ला सकता।

  2. Influential people are behind the theft of temple offerings in India, who are using the stolen money to buy opposition MPs, this is an issue on which accountability and debate should happen in Parliament.
    भारत में मंदिर के चढ़ावे की चोरी के पीछे प्रभावशाली लोग हैं, जो चोरी किए गए धन का उपयोग विपक्षी सांसदों को खरीदने के लिए कर रहे हैं, यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर संसद में जवाबदेही और बहस होनी चाहिए।

    The Father of the Nation launched the Non-Cooperation Movement for

  3. पांच किलो राशन लेना है कि शिक्षा लेना है या हिन्दू राष्ट्र लेना है चलो सोच कर देखना

  4. गांधीजी के चरखे से आजादी आयी या सुभाषचंद्र बोष की आजाद हिन्द फौज की बजह से सोचना है

  5. भाई साहब ने सही बोला कि नागरिकों का कोई मतलब नहीं है क्योंकि जब तक मशीन जिंदा है